डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीएल) के मल्टीटास्किंग स्टाफ पद के लिए हुई परीक्षा में एक अभ्यर्थी ने अपनी जगह दूसरे युवक को बिठा दिया। उसने परीक्षा पास कर ली, लेकिन नौकरी पाने से पहले ही तकनीक ने उसके फर्जीवाड़े का खुलासा कर दिया।
बॉयोमेट्रिक सत्यापन में पकड़े जाने पर उसने गुनाह कबूल करते हुए बताया कि नौकरी लगने के बाद मुन्नाभाई को पांच लाख रुपये देने का वादा किया था। प्रगति मैदान मेट्रो पुलिस ने फर्जीवाड़े का केस दर्ज कर कर अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर लिया। अब मुन्नाभाई की तलाश हो रही है।
डीएफसीसीएल के असिस्टेंट मैनेजर गिरीश कुमार ने सोमवार को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि विभाग में मल्टीटास्किंग स्टाफ के 896 पदों पर भर्ती चल रही है। इसके लिए गत वर्ष नवंबर में परीक्षा हुई थी। इसमें पास होने वाले अभ्यर्थियों के कागजात का सत्यापन चल रहा है। सोमवार को बिहार के गया निवासी शैलेश कुमार भी कागजात के सत्यापन के लिए पहुंचा।
परीक्षा के दौरान लिए गए बायोमेट्रिक डेटा से शैलेश का डाटा नहीं मिल रहा था। शक होने पर अधिकारियों ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो शैलेश ने बताया कि परीक्षा में उसकी जगह रोशन नाम का युवक बैठा था।
उसके चाचा ने नौकरी मिल जाने पर रोशन को पांच लाख रुपये देने का वादा किया था। मेट्रो पुलिस उपायुक्त विक्रम पोरवाल ने बताया कि शैलेश को गिरफ्तार कर लिया गया है।