दान पुण्य का प्रतीक मकर संक्राति का पर्व शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गरीबों व ब्राह्मणों को तिल, गुड़, चावल, मूंग, गेंहू व खिचड़ी का दान किया। कई जगह पर कंबल वितरण समारोह आयोजित किए गए।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर श्रद्धालुओं ने सुबह उठकर स्नान कर सूर्य को अघ्र्य दिया। खिचड़ी एंव तिल के लड्डू के साथ सूर्यदेव को भोग लगाया गया। इसके बाद ऊं नम: शिवाय, ऊं सूर्याय नम: और ऊं भूर्भुव: स्व:गायत्री मंत्रों का उच्चारण किया।
इस अवसर पर लोगों ने चावल, दाल, तिल, गर्म कपड़े, खिचड़ी आदि का दान भी किया। मंकर संक्रांति पर प्रयाग इलाहबाद, हरिद्वार, नर्मदा, गंगासागर आदि में स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है।
इसी को ध्यान में रखते हुए बहुत से श्रृद्धालु शहर में स्थित पवित्र नदियों व कुंडों में स्नान करने के लिए पहुंचे। बडख़ल झील स्थित पर्सोन मंदिर के ब्रह्रा कुंड में शुक्रवार को श्रृद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मंदिर में सूर्य देवता की विशेष पूजा अर्चना की गई।
दिनभर चला दान-पुण्य का सिलसिला
मकर संक्रांति के दिन सुबह से लेकर शाम तक दान-पुण्य का सिलसिला चलता रहा। विवाहिताओं ने मूंगफली, दाल, चावल, रेबड़ी, कपड़ों आदि का दान अपने से उम्र में बड़ी महिलाओं व बुजुर्गों को किया।
जगह-जगह खिचड़ी के भंडारे का आयोजन हुआ। समाजसेवी संस्थाओं द्वारा गरीब बच्चों को गर्म कपड़े, कंबल आदि बांटे गए। सेक्टर 21 स्थित समन्व्य परिवार मंदिर में आयोजित हवन-यज्ञ के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।
आयोजनकर्ता एचएल भूटानी ने कहा कि विज्ञान के युग में भी मकर संक्रांति जैसे त्योहारों का अपना विशेष महत्व है। इस पर्व के अच्छे प्रभाव से कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है।
जहां एक ओर आध्यात्मिक दृष्टि से इस अवसर पर किये गये दान-पुण्य से आत्मिक संतुष्टि मिलती है वहीं दूसरी ओर लोगों की सेवा करने का अवसर भी प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि पुराने समय से ही मकर संक्रान्ति पर सूर्य भगवान की पूजा अर्चना की जाती है जो कि हमें प्रकृति के नजदीक लाकर उससे मिलने वाले लाभ का अवसर प्रदान करती है।
प्राचीन हनुमान मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष गंगेश तिवारी ने सेक्टर-22 के आसपास की झुग्गियों के बच्चों को गर्म कपड़े व कंबल दान किए। इस मौके पर समिति उपाध्यक्ष राजेश सिंह, सचिव प्रदीप गुप्ता व मुन्नीलाल आदि मौजूद रहे। इसके अलावा सेक्टर-3 हुनमान मंदिर, एनआईटी स्थित काली मंदिर में भंडारे का आयोजन हुआ।
आज से शुरू होगें सभी मांगलिक कार्य
मकर संक्राति से खर मास समाप्त हो गया है। भास्कर देवता दक्षिणायन से उत्तरायन में प्रवेश कर गए है। अब शुभ कार्य शुरू होगें। भारतीय ज्योतिष और हिंदू धर्म में मान्यता के अनुसार पौष मास यानी की खर मास को शुभ कार्यो के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
लिहाजा इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य नही होते है। शनिवार से शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी और विवाह सहित अन्य मंगल कार्य भी शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषियों के अनुसार 15 जनवरी से 14 मार्च तक मंगल कार्य संपन्न किए जा सकेंगे।
इस दौरान विवाह के कुल 24 मुहूर्त हैं। सबसे अधिक विवाह मुहूर्त फरवरी माह में है। फरवरी माह में 12 दिन शादियां हो सकेंगी। जनवरी माह में विवाह का पहला मुहूर्त 16 जनवरी को है। इस माह के शेष बचे दिनों में विवाह के लिए 7 दिन मिलेंगे।