15 सितंबर से प्रभावी हुआ बदलाव, तीन लाख से अधिक के कंसाइनमेंट पर शर्त बरकरार
छोटे ऑर्डर से विदेशी बाजार परख सकेंगे व्यापारी
सनी सिंह
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए तीन लाख रुपये तक के निर्यात कंसाइनमेंट के लिए आरसीएमसी (रजिस्ट्रेशन-कम-मेंबरशिप सर्टिफिकेट) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। यह बदलाव 15 सितंबर से प्रभावी हो गया है, जिससे घरेलू बाजार से बाहर विदेशी ग्राहकों तक पहुंचना आसान होगा। दिल्ली के छोटे कारोबारी अब बिना रजिस्ट्रेशन के छोटे कंसाइनमेंट भेजकर विदेशी बाजार को परख सकेंगे।
यह छूट कंसाइनमेंट के एफओबी मूल्य पर लागू होगी। तीन लाख रुपये से अधिक के कंसाइनमेंट में आरसीएमसी अभी भी जरूरी रहेगी। इस कदम से सदर बाजार, चांदनी चौक, करोलबाग और गांधी नगर जैसे थोक बाजारों के व्यापारियों को लाभ मिलेगा। सरकार का उद्देश्य एमएसएमई, कारीगरों और पहली बार निर्यात करने वालों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना है। चांदनी चौक के व्यापारियों ने बताया कि यह बदलाव विदेशी बाजार में शुरुआती कदम रखने का अवसर देगा।
छोटे निर्यातकों को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार के इस निर्णय से छोटे कारोबारी बड़े निवेश के बिना विदेशी बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। वे छोटे कंसाइनमेंट भेजकर उत्पाद की विदेशी मांग और ग्राहक की प्रतिक्रिया का आकलन कर सकते हैं। यह कदम विशेष रूप से उन व्यापारियों के लिए फायदेमंद है जो अभी तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से हिचकते थे। इससे उन्हें अमेरिका, ब्रिटेन या यूएई जैसे बाजारों में अपनी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
आंकड़ों में छोटे निर्यात की क्षमता
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 3,000 डॉलर तक के निर्यात कंसाइनमेंट कुल शिपिंग बिलों के 43 प्रतिशत थे। हालांकि, कुल वस्तु निर्यात मूल्य में इनकी हिस्सेदारी केवल 0.86 प्रतिशत रही। छोटे ऑर्डर की संख्या बहुत अधिक है लेकिन कुल निर्यात मूल्य में उनका योगदान कम है।
कोट्स
-भारतीय निर्यातकों ने नए और उभरते बाजारों में अवसरों का इस्तेमाल करना शुरू किया है, लेकिन आगे की वृद्धि के लिए एमएसएमई को वित्त, लॉजिस्टिक्स और बाजार पहुंच में लगातार समर्थन की जरूरत होगी।
-एससी रहलान, अध्यक्ष, एफआईईओ
-वैश्विक बाजारों में भारतीय एमएसएमई के लिए नए अवसर बन रहे हैं। छोटे कारोबारियों को इन बाजारों और व्यापारिक समझौतों के प्रावधानों की जानकारी देकर निर्यात क्षमता बढ़ानी होगी।
-प्रवीण खंडेलवाल, राष्ट्रीय महामंत्री, कैट
-तीन लाख तक के कंसाइनमेंट पर आरसीएमसी से छूट से अब कारोबार को वैश्विक बनाया जा सकता है, जिससे भारतीय माल को विदेशों में भी पहचान मिलेगी।
-प्रदीप जैन, कारोबारी, करोलबाग
-सबसे बड़ी दिक्कत कागजी प्रक्रिया के साथ विदेशी ग्राहक ढूंढना है। आरसीएमसी की बाधा हटने के बाद अगर खरीदार भी आसानी से मिलें तो छोटे व्यापारी निर्यात शुरू कर सकते हैं।
-परमजीत सिंह, व्यापारी नेता
-छोटा ऑर्डर मिलने पर पहले यह देखना पड़ता है कि माल भेजने का खर्च और बाकी लागत निकालकर कितना मार्जिन बचेगा। आरसीएमसी की छूट अच्छी है, लेकिन सस्ती लॉजिस्टिक्स भी जरूरी है।
- आनंद जैन, कारोबारी, चांदनी चौक
-छोटे विदेशी ऑर्डर के लिए आरसीएमसी की औपचारिकता कम होना राहत की बात है। लेकिन ग्राहक और लॉजिस्टिक्स की चुनौती बरकरार है।
- प्रदीप कुमार, कारोबारी, करोलबाग