गौतमबुद्ध नगर के भाजपा एमपी महेश शर्मा को जान का खतरा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिली इस जानकारी के बाद प्रदेश सरकार ने सांसद की सुरक्षा को लेकर आकलन शुरू कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नोएडा में पिछले दिनों हुई एक भाजपा नेता की हत्या और इसके पीछे भू-माफिया की सक्रियता का हवाला देते हुए भाजपा सांसद की जान को खतरा होने की बात कही है। ऐसा केंद्रीय खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट पर किया गया है। केंद्र से इसकी जानकारी यूपी सरकार को दे दी गई है। केंद्र से हासिल इस सूचना पर गृह विभाग के अधिकारियों ने आला पुलिस अफसरों से इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने को कहा है।
एडीजी कानून-व्यवस्था मुकुल गोयल ने बताया कि पुलिस सांसद को हासिल सुरक्षा व उन्हें बताए जा रहे खतरे का आकलन कर रही है। इसके लिए नोएडा के एसएसपी व डीएम से भी रिपोर्ट तलब की गई है। जिले के अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद शासन स्तर पर सांसद की सुरक्षा बढ़ाए जाने पर फैसला संभावित है।
पश्चिमी यूपी के दो बड़े गिरोहों पर है शक
खुफिया विभाग ने आशंका जताई है कि दादरी में विजय पंडित हत्या का पुरजोर विरोध करने और क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते नोएडा के सांसद डॉ. महेश शर्मा की जान को खतरा है। कई गिरोहों की फोन टेपिंग में कुछ ऐसी बातें निकलकर आईं हैं, जिसमें बड़ी साजिश का जिक्र किया गया है।
इससे पहले विजय पंडित हत्याकांड के बाद खुद एडीजी देवेंद्र सिंह चौहान ने नोएडा में प्रेस वार्ता कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो बड़े गिरोहों सुंदर भाटी और अनिल दुजाना गैंग के 37 शूटरों को चिह्नित करने की बात कही थी। इस हत्याकांड के दो-तीन दिन बाद ही नोएडा सांसद को भी जान का खतरा होने की बात सामने आई थी। जिला पुलिस ने तत्काल प्रभाव से उनकी सुरक्षा बढ़ा दी थी।
हालांकि, सांसद महेश शर्मा के पास निजी सुरक्षा दस्ता भी है। डॉ. महेश शर्मा ने खुद गृह मंत्रालय दिल्ली को जान का खतरा होने की सूचना दी थी। इसको देखते हुए गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार को सांसद की सुरक्षा की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, डॉ. शर्मा इस समय शहर से बाहर गुजरात में हैं। अमर उजाला ने इस संबंध में उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन शहर से बाहर होने के चलते उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
लोकल खुफिया तंत्र ने भी भेजी रिपोर्ट
विजय पंडित हत्याकांड की हकीकत को जानने के लिए सात सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। बीजेपी सांसद सतपाल सिंह ने नेतृत्व में लोगों पूछताछ कर एक रिपोर्ट गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश अध्यक्ष को लक्ष्मीकांत बाजपेई को सौंपी गई थी। इस कमेटी में डॉ. महेश शर्मा भी थे।
बताया जा रहा है कि सांसद डॉ. महेश शर्मा की सुरक्षा को लेकर लोकल खुफिया तंत्र भी सक्रिय था। जिसके बाद लोकल इंटेलिजेंस ने भी डॉ. महेश शर्मा की सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका जाहिर की थी। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रदेश शासन को भी भेजी गई थी।
वर्ष 2012 में रविंद्र शर्मा हत्याकांड के बाद भी दादरी में जमकर हंगामा हुआ था। इस दौरान अभियुक्त के घरों को जनता द्वारा आग के हवाले भी कर दिया गया था। इस मामले की पैरोकारी जहां विजय पंडित कर रहे थे। वहीं, डॉ. महेश शर्मा ने भी जमकर विरोध किया था। इस समय से ही वह हत्यारों के निशाने पर रहे हैं।
पहले भी हो चुका है हमला
2009 में लोकसभा चुनावों के दौरान भी डॉ. महेश शर्मा पर हमला हुआ था। बीजेपी नेता संजय बाली ने बताया कि उस दौरान सेक्टर-27 के कैलाश अस्पताल में उनके भाई डॉ. नरेश के साथ वह डॉ. महेश शर्मा का इंतजार कर रहे थे। डॉ. महेश कुछ ही देर में पहुंचने वाले थे। इसी दौरान अस्पताल पर गोली चलाई गई। एक गोली अस्पताल के गार्ड के कंधे पर लगी थी।
एसएसपी गौतमबुद्ध नगर डॉ. प्रीतिंदर सिंह कहा है कि गृह मंत्रालय द्वारा प्रदेश शासन को भेजी इस तरह की रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। अगर गौतमबुद्ध नगर पुलिस को इस बारे में कोई सूचना मिलती है तो वह प्रमुखता से कार्रवाई करेंगे।
बीजेपी महानगर अध्यक्ष बिजेंद्र नागर ने बताया कि प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की समस्या है। जिले में भी लगातार बीजेपी नेताओं पर हमलों की सूचनाएं मिल रही हैं। इसी कड़ी में सांसद पर भी हमले का अंदेशा पहले ही जताया गया था। अब गृह मंत्रालय की चिंता इस मामले में जायज है।