गीता कॉलोनी के नकली तालाब में श्रद्धालुओं का जमघट
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पूर्वांचल के लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और श्रद्धा के महापर्व छठ के तहत बृहस्पतिवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व को मनाया। कांचे ही बांसा के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...जैसे छठ गीतों की गूंज के बीच श्रद्धालु यमुना नदी के किनारे और दिल्ली के दूसरे छठ घाटों पर जुटे। व्रतियों ने परंपरागत गीतों और श्रद्धा से सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर मेलों की भी धूम रही, जहां भक्तों ने अपनी धार्मिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी आनंद लिया।
राजधानी में विभिन्न स्थानों पर बृहस्पतिवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद लाखों श्रद्धालुओं ने शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूरी रात घाटों पर डेरा डाला। इस दौरान घाटों को दीयों और रोशनी से सजाया गया। श्रद्धालुओं में छठ पर्व पर भक्तिमय माहौल देखने लायक था। महिलाएं सिर पर पूजा सामग्री से भरी टोकरियां लिए घाटों पर पहुंचीं और श्रद्धा से अर्घ्य अर्पित किया।
छठ घाटों पर नेताओं की मौजूदगी, दिखा सियासी रंग भी
छठ पर्व पर श्रद्धा और आस्था के साथ राजनीति का रंग भी नजर आया। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने श्रद्धालुओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगोलपुरी और उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने घर पर ही अर्घ्य दिया। इसके बाद उन्होंने सोनिया विहार में छठ घाट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं को बधाई दी। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आईटीओ समेत कई घाटों पर श्रद्धालुओं से मुलाकात की और आप सरकार पर छठ के लिए उचित व्यवस्थाएं न करने का आरोप लगाया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सोनिया विहार के घाट पर भोजपुरी गीतों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनके गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। छठ पर्व ने दिल्ली में न केवल श्रद्धा और आस्था का माहौल बनाया बल्कि सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का भी संदेश दिया।
दिखी अव्यवस्था भी... कृत्रिम जलाशयों में पानी न होने से सड़क जाम कर प्रदर्शन किया
पूर्वी दिल्ली की गीता कॉलोनी में छठ पूजा के लिए बनाए गए कृत्रिम जलाशय में पानी नहीं भरे जाने से श्रद्धालुओं ने रोड जाम कर प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं ने पानी भरने के लिए प्रशासन और स्थानीय विधायक से लगातार गुहार लगाई, लेकिन शाम तक भी इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया। पूजा का समय आते ही श्रद्धालुओं की निराशा और बढ़ गई, क्योंकि पानी के अभाव में वे पूजा करने में असमर्थ थे। श्रद्धालुओं का कहना है कि सुबह से व्रत रखकर पूजा की तैयारी में लगे थे, लेकिन पानी न होने की वजह से उनकी आस्था आहत हुई है।