हनुमान सबके हैं, हनुमान हमारे हैं यह कहना उनके लिए छोटी बात होगी। हम हनुमान के हैं यह कहना चाहिए। मुसलमान कहें कि हनुमान हमारे हैं तो उन्हें कहना चाहिए कि हम हनुमान के हैं। क्योंकि हनुमान उनके भी पूर्वज हैं। उन्हें किसी भी जाति, पंथ क्षेत्र में बांटने की संकीर्णता छोड़नी चाहिए।
वे सबके हैं और सबको मुक्ति एवं निरोगता प्रदान करने वाले हैं। यह बातें महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर महाराज ने कहीं। वे इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद, खुखरायण वर्ल्ड ब्रदरहुड सनातन धर्म प्रतिनिधि की तरफ से पहाड़गंज स्थित उदासीन आश्रम में आयोजित स्वामी राघवानंद महाराज के 83वें जन्मदिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि परमात्मा सबके हैं, हनुमान सबके हैं, वायु पुत्र हैं। हनुमानजी वनवासी भी थे, वनवासियों में रहकर उन्होंने चेतना प्रदान की। वे समन्वय का प्रतीक हैं। इस मौके पर रामानंदा हंस देवाचार्य ने कहा कि सही मायने में हम सभी को अपना जन्मदिवस सेवा भाव के रूप में मनाना चाहिए।
स्वामी राघवानंद महाराज ने कहा कि महापुरुषों की कोई जाति नहीं होती है। हरि को भजे सो हरि का होई। जो भगवान का भजन करता है वह भगवान का होता है। कार्यक्रम में स्वामी जगद्गुरु रामानंदाचार्य, स्वामी हंस देवाचार्य महाराज, केंद्रीय मंत्री जुगल किशोर, विश्व हिंदू परिषद प्रांत मंत्री बचन सिंह, प्रांत मीडिया प्रमुख महेंद्र रावत, सांसद मीनाक्षी लेखी भी उपस्थित थी। इस मौके पर रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य मेले का भी आयोजन किया गया।