सैंपल फेल हुए तो कभी बाजार में छाई रहने वाली ‘मैगी’ अब बाजार से गायब हो गई है। दुकानदारों ने ‘मैगी’ के ऑर्डर कैंसल करा दिए हैं। साथ ही पुराना स्टॉक भी हटा दिया है।
उधर, महिलाओं और मैगी के दीवाने बच्चों ने भी इससे मुंह मोड़ लिया है। अब घरों में इसका विकल्प तलाशा जा रहा है।
बड़े सुपर मार्केट में मैगी का स्टॉक पहले ही हटा दिया गया था, अब छोटी दुकानों से भी स्टॉक को हटा दिया गया है।
गली-मुहल्ले में बिकने वाली मैगी के अब न खरीदार बचे और न ही दुकानदार इसे दुकान में रखना चाहते हैं। चंद दिन पहले तक नूडल्स में सबसे ज्यादा बिक्री मैगी की होती थी।
लेकिन सैंपल फेल होने के बाद मैगी की सेल लगभग खत्म (फ्रीज) हो गई है। दुकानदारों की आमदनी पर भी इसका असर पड़ा है।
एनडीआरएफ में मैगी बैन
नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स ने जवानों की सेहत के मद्देनजर बटालियन के कैंटीन में मैगी बनाने पर रोक लगा दिया है।
व्यापारियों संग स्वयंसेवी संस्थाओं ने जलाई मैगी
प्राइवेट चिकित्सक वेलफेयर एसोसिएशन ने मैगी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। एसोसिएशन के संस्थापक बीके शर्मा ने कहा कि मैगी में रोक लगाई जाए।
महाकाल मानव सेवा समिति ने कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। उधर, संयुक्त व्यापार मंडल से जड़े व्यापारियों ने संगठन के मेरठ मंडल अध्यक्ष अरविंद कुमार तेवतिया के नेतृत्व में शास्त्रीनगर चौराहे पर मैगी के पैकेट जलाए।