चंद्रग्रहण की वजह से बुधवार को सुबह साढ़े पांच बजे से ही बंद मंदिरों के कपाट शाम सवा छह बजे खुले। इसके बाद लोगों ने मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की।
ग्रहण से पूर्व लगे सूतक की वजह से सुबह 5.44 मिनट से ही सभी मंदिरों के पट बंद हो गए थे। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की साफ-सफाई के बाद भक्तों के लिए पट खोले गए। मंदिरों के द्वार खुलने के बाद शाम की पूजा अर्चना व आरती संपन्न हुई।
दूधेश्वरनाथ मंदिर के महंत नारायण गिरि ने बताया कि सुबह की आरती के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया गया था। इस बीच मंदिर में पूजा अर्चना व भजन कीर्तन चलता रहा।
शाम को 6.06 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद भक्तों के लिए मंदिर के पट खोले गए। दिल्ली गेट देवी मंदिर के पंडित रामभजन मिश्र ने बताया कि शाम को सवा छह बजे मंदिर का द्वार खोल दिया गया था। उन्होंने बताया कि जब तक ग्रहण था तब तक मंदिर में दुर्गा सप्तशती व सुंदर कांड का पाठ किया गया।
यह था ग्रहण का समय
चंद्रग्रहण का समय : दोपहर 2.44 से शुरू होकर 6.06 बजे दिल्ली एनसीआर में 5.58 से 6.06 बजे तक
सूतक: सुबह 5.44 बजे से शाम 6.06 बजे तक