हिंदू महासभा के नेता रहे और वतर्मान में हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी (50) की बीते शुक्रवार(18 अक्तूबर) दोपहर दो बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी और तब से ही इस मामले में हर रोज पुलिस कातिलों को पकड़ने के लिए यहां-वहां छापेमारी कर रही है।
बेशक कातिल अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं लेकिन यूपी एटीएस के हाथ छापेमारी में कई अहम सबूत मिले हैं। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम में अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुईं और पुलिस के हाथ क्या-क्या सबूत लगे...
पढ़ें पूरा घटनाक्रम-
- 17 अक्तूबर की रात 11.08 बजे हत्यारों ने होटल के रजिस्टर में अपनी एंट्री कराई
- 18 अक्तूबर की सुबह 10.38 बजे वारदात को अंजाम देने दोनों होटल से बाहर चले गए
- 18 अक्तूबर की दोपहर 12.00 बजे से 1.00 बजे के बीच दोनों हत्यारोपियों ने कमलेश तिवारी के दफ्तर में उनकी पहले चाकू और तमंचे से निर्मम हत्या कर दी।
- 18 अक्तूबर की दोपहर 01.21 बजे कमलेश की हत्या के बाद दोनों होटल लौटकर आए
- 18 अक्तूबर की दोपहर 01.37 बजे हत्यारोपी बिना बताए होटल से गायब हुए
- 19 अक्तूबर की सुबह कमलेश तिवारी हत्याकांड की जांच के तहत राप्ती गंगा एक्सप्रेस में हमलावरों के सवार होने का इनपुट मिलने पर ट्रेन को कटघर थानाक्षेत्र में आउटर पर रुकवा लिया गया। यहां पर यूपी एसटीएफ, रामपुर और मुरादाबाद पुलिस ने ट्रेन में चेकिंग की और उसमें सवार छह संदिग्धों को हिरासत में लिया। इन्हें पूछताछ के बाद दोपहर में छोड़ दिया गया।
- 19 अक्तूबर की दोपहर डीजीपी की प्रेस कांफ्रेंस हुई जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि कमलेश तिवारी की हत्या पैगंबर मोहम्मद को लेकर उनकी एक टिप्पणी की वजह से की गई है। इसमें सूरत से तीन साजिशकर्ता राशिद, मोहसिन और फैजान को गिरफ्तार किया गया है। वहीं डीजीपी ने ये भी बताया कि बिजनौर से मोहम्मद मुफ्ती नईम काजमी और इमाम मौलाना अनवर उल हक को हिरासत में लिया है। एफआईआर के मुताबिक, काजमी और हक ने 2016 में पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर तिवारी के सिर पर 1.5 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी।
- 19 अक्तूबर को हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी का दोपहर बाद महमूदाबाद में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले परिवारीजन और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घटनास्थल पर बुलाने की मांग पर अड़े थे। डीएम, एसपी और क्षेत्रीय विधायक परिवारीजनों को अंतिम संस्कार के लिए समझाने में कामयाब नहीं हो सके। इसके बाद उन्हें समझाने का जिम्मा आईजी और लखनऊ के कमिश्नर ने उठाया। परिवारीजनों के साथ नौ सूत्री समझौता हुआ। इसमें परिवार को सुरक्षा के साथ अन्य कई मांगें शामिल थीं। जिसके बाद बेटे सत्यम ने पिता को मुखाग्नि दी।