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शुंगलू कमेटी पर उपराज्यपाल और आप सरकार में तकरार, कैबिनेट ने जंग को दी सलाह 

Sat, 15 Oct 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नजीब जंग और केजरीवाल
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने उपराज्यपाल की तरफ से वीके शुंगलू की अध्यक्षता में गठित समिति और उसकी रिपोर्ट को असंवैधानिक करार दिया है।
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एक प्रस्ताव पास करके उपराज्यपाल नजीब जंग को सलाह दी है कि संविधान की रक्षा करें ताकि जनकल्याण के उपाय पटरी से न उतरें। 

समिति को भंग करने की सलाह देने के साथ कहा है कि अगर समिति अवैध काम जारी रखती है तो राजधानी में गंभीर संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।

कैबिनेट ने तर्क दिया है कि संविधान में या किसी अध्यादेश अधिनियम में ऐसा कहीं प्रावधान नहीं है कि चुनी गई सरकार की परियोजनाओं की जांच, अधिकारियों से पूछताछ और उनके खिलाफ आपराधिक तथा प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करने की धमकी देने के लिए कोई बाह्य समिति बनाने का अधिकार उपराज्यपाल को हो। 

फैसले लागू होने के लंबे समय बाद खारिज करके उपराज्यपाल कार्यालय खतरनाक परंपरा डाल रहा है। कैबिनेट ने संविधान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम और ट्रांजिक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स का हवाला देने के साथ कहा है कि समिति ने नौकरशाही में खतरनाक माहौल बना रखा है। 
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'न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या कर रहे हैं उपराज्यपाल'

केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
कामकाज के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो गया है। क्योंकि कई अधिकारियों ने संबंधित मंत्री को रिपोर्ट दी है कि समिति ने अनौपचारिक रूप से समन करके कई घंटे पूछताछ की। 

अधिकारी की बातों को प्रक्रिया में शामिल नहीं करना पारदर्शिता और मर्यादा के स्थापित नियमों के खिलाफ है। कैबिनेट ने कहा है कि उपराज्यपाल 4 अगस्त के न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या कर रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की तरफ से न्यायिक फैसले की गलत व्याख्या न्याय का मजाक उड़ाना है। उपराज्यपाल की तरफ से 400 फाइलें जब्त करना कानून के खिलाफ है। 

उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि फाइलें तुरंत लौटाएं। यह भी कहा है कि उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम नहीं है, उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है। 15 नवंबर तक इंतजार करना चाहिए।

कैबिनेट ने उपराज्यपाल को सलाह दी है कि अगर किसी फैसले पर मतभेद है तो संबंधित मंत्री को बुलाकर चर्चा करें, टीबीआर के नियम 49 में मतभेद खत्म करने की कोशिश करें। 

वापस मंत्री मंडल को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं। साथ ही लिखा है कि संविधान और टीबीआर में प्रावधान है कि मंत्रिमंडल के फैसले से मतभेद है तो राष्ट्रपति को राय के लिए भेजें, उनके फैसले को मानें।
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