डीजल-पेट्रोल के 10-15 साल पुराने वाहनों के एनसीआर से बाहर करने के आदेश के बाद अब एलपीजी किट लगे वाहनों पर भी संकट मंडरा रहा है।
गाजियाबाद सि्थत लाल कुआं पर एलपीजी गैस किट का टेस्टिंग सेंटर पिछले दो वर्ष से बंद होने के कारण वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिसके कारण आरटीओ में रोजाना दर्जनों वाहनों से किट उतारी जा रही है।
एलपीजी के वाहनों का एक मात्र फिटनेस सेंटर मुंबई में है। सीएनजी लगे वाहनों की प्रत्येक तीन महीने पर टेस्टिंग की जाती है। जबकि एलपीजी गैस दूर से ही गैस पकड़ती है।
इनके परीक्षण को परिवहन विभाग ने पांच साल की गाइड लाइन तय की है। एलपीजी लगवाकर वाहन चालकों को पांच साल तक टेस्टिंग और फिटनेस कराने की जरूरत नहीं होती है।
आरटीओ में पहुंचने या रोड पर जांच में पकड़े जाने पर ऐसे वाहनों को सीज किया जा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों को मजबूरी में दूसरी नई किट लगवानी पड़ती है या फिर किट उतारकर गाड़ी को पेट्रोल पर चलाना पड़ रहा है।
‘एलपीजी किट का टेस्टिंग-फिटनेस सेंटर केवल मुंबई में है। फिटनेस सर्टिफिकेट के बगैर संचालन नहीं हो सकता। ऐसे वाहनों से किट उतारकर दूसरी आरसी जारी की जा रही है।’ - केपी गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन।
एलपीजी वाहनों की आयु बढ़ाने या फिटनेस सेंटर खुलवाने का काम केंद्र का है। एक सुझाव केंद्र को पिछले दिनों भेजा गया था। अभी तक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। तब तक पांच साल पूरा कर चुके एलपीजी वाहनों का संचालन नहीं हो सकता है। - के.रविंद्र नायक, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर।