गैस सिलेंडर महंगा होने पर लोगों की प्रतिक्रिया
राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी प्राइस इन्फ्लेशन इंडेक्स के हिसाब से बहुत मामूली है। पूरी दुनिया में एनर्जी की कीमतें बढ़ रही हैं। शोर मचाना विपक्ष का काम है। वहीं कीमत बढ़ने पर कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि यह निश्चित रूप से चिंता की बात है। पहले से ही बहुत महंगाई है और अगर अब कीमतें बढ़ी हैं, तो जनता पर बोझ और बढ़ेगा। सरकार को चिंतित होना चाहिए और इस पर गौर करना चाहिए।
दिल्ली की रहने वाली अनीता ने कहा कि अगर कीमत बढ़ी तो हम दिल्ली में कैसे रहेंगे। हमारा सिलेंडर एक महीने भी नहीं चलता। हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एक अन्य महिला ने बातचीत करते हुए कहा कि हम गरीब हैं। हमारे लिए 60 रुपये बहुत ज्यादा हैं। होली के बाद कीमत बढ़ा दी हैं।
दिल्ली में महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर
इससे पहले, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से अपरिवर्तित थी, जब दिल्ली में गैर-सब्सिडी दर 853 रुपये थी। नवीनतम संशोधन से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उन व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए भी काफी वृद्धि हुई है जो दैनिक कार्यों के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं।
एस्मा लागू
इससे पहले सरकार ने गैस कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एस्मा भी लागू किया। सरकार ने एस्मा कानून के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। भारत में तेलशोधन क्षमता पर्याप्त होने के बाद भी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन में कमी को देखते हुए उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिया गया है। इसका मकसद पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण व्यवधानों से निपटने के लिए घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाना है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पांच मार्च के आदेश में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की सभी रिफाइनरियों से सुनिश्चित करने को कहा है कि उत्पादन के दौरान निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन में किया जाए। एलपीजी असल में प्रोपेन एवं ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होता है और देश में इसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जाता है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (एस्मा) के तहत जारी इस आदेश में रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे उत्पादित एलपीजी को सिर्फ तीन सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को ही उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही, रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में करने से रोक दिया गया है।