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कम मतदान हुआ तो AAP की हो सकती है बल्ले-बल्ले

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दिल्ली के सिंहासन पर कौन बैठेगा इसका फैसला विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत और कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो 65 प्रतिशत से अधिक मतदान होना भाजपा के लिए शुभ संकेत माना जा रहे है, जबकि 65 प्रतिशत से कम मतदान हुआ तो आम आदमी पार्टी के हाथ में चाबी आ सकती है। मगर इस स्थिति में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहना चाहिए। अगर कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रही तो आप के समक्ष दिक्कत पैदा हो सकती है।
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राजधानी के माहौल, चुनाव आयोग के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों विशेषकर आप व भाजपा की तैयारी के मद्देनजर इस बार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत का वर्ष 2013 का रिकार्ड टूट सकता है। सवाल उठ रहा है कि मत प्रतिशत का किसको लाभ होगा और किसे नुकसान।

पहले चारों चुनाव में मत प्रतिशत ज्यादा एवं कम होने से चुनाव परिणाम तय नहीं हुआ था, बल्कि कांग्रेस एवं भाजपा के अलावा अन्य राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों की उपस्थिति की अहम भूमिका रही थी और उसका लाभ एक बार भाजपा और तीन बार कांग्रेस को मिला।
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पिछली बार मतदान प्रतिशत बंटने से हुआ नुकसान

पिछले चुनाव में मतदान के प्रतिशत से सत्ता का फैसला नहीं हो सका था। क्योंकि आप की मौजूदगी ने कांग्रेस व भाजपा के समीकरण बिगाड़ दिए थे। मगर इस चुनाव में मतदान के प्रतिशत की अहम भूमिका मानी जा रही है।

पिछले चुनाव में मतदान अधिक होना आप के लिए फायदेमंद माना गया था, लेकिन इस बार मतदान अधिक होता है तो उसका लाभ आप के बजाए भाजपा को होगा। क्योंकि भाजपा की ओर मध्यम और उच्च वर्ग का झुकाव माना जा रहा है और इन दोनों वर्गों के लोग मतदान के लिए बहुत ही कम घरों से निकलते है।

जबकि कम मतदान होने से आप व कांग्रेस को लाभ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। क्योंकि इन दोनों दलों के समर्थक निचला तबका, अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़े वर्ग माने जा रहे है और इन वर्गों के लोग हर हाल में वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंचते है। अब सवाल उठता है कि इन वर्गों में कांग्रेस को कितना वोट मिलता है।

वह वोट बांटने में कामयाब रही तो उसका लाभ भाजपा को हो सकता है। ऐसे में कम मतदान में भी भाजपा की बल्ले-बल्ले होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है, अगर कांग्रेस खाली हाथ रही तो आप के लिए रास्ता पूरी तरह साफ होगा।
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