द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वेदों के विरुद्ध बोलने पर हमने विष्णु के अवतार रूप में आए भगवान बुद्ध को भी स्वीकार नहीं किया था। फिर उमा भारती तो राजनीतिक बयानबाजी कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसी को भी धर्म और शास्त्रों का मखौल बनाने की छूट नहीं दी जा सकती। संतों का जीवन शास्त्रों की रक्षा के लिए होता है, इसके लिए शस्त्र तक भी जा सकते हैं। वह सोमवार को गाजियाबाद के सिहानी गांव में एक व्यक्तिगत कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पहली बार हर-हर मोदी, घर-घर मोदी नारे का विरोध करने और संघ से बातचीत कर इस पर रोक लगवाने को लेकर चर्चाओं में आए द्वारका और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आजकल र्साइं पूजा के विरोध को लेकर चर्चाओं में हैं।
साईं पूजा का विरोध करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भगवान अजर-अमर है। हम मूर्ति की पूजा करते हैं, जड़ की नहीं। प्रत्यक्ष में किसी ने नहीं देखा कि गंगा में स्नान करने से पाप धुलते हैं। शास्त्र ही प्रमाण और विश्वास हैं। इसके बाद न तो संघ के पास जाने की जरूरत रह जाती है और न ही सरकार के पास।
उन्होंने शालीनता के साथ कहा कि राष्ट्र और समाजहित में हमेशा बोलता रहूंगा। शास्त्र पर आघात और मंदिरों में साईं की मूर्ति लगाना सहन नहीं किया जाएगा। इस मौके पर भाजपा नेता नितिन त्यागी, चारधाम विकास पीठ के उपाध्यक्ष सुबोधानंद सरस्वती, बाबा संजय त्यागी और राजन त्यागी आदि मौजूद रहे।
महिलाओं पर हो रहे अपराध की जड़ में चीन
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि महिलाओं पर बढ़ रहे अपराध का आधार नशा है। देश में नशे का धंधा चीन से संचालित हो रहा है।
स्कूल-कालेजों के बाहर नशे के कारोबारियों का कब्जा है। महिलाओं की रक्षा और युवाओं के चरित्र निर्माण केलिए नशे का सफाया कर भोजन में सुधार और भजन में विस्तार करना होगा।