गर्मी की दस्तक से पहले राजधानी में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) में लगे 100 से अधिक बोरवेल चालू करने की अनुमति मांगी है।
दिल्ली हाई कोर्ट के स्टे के कारण नहीं हो पा रहे कुछ काम
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने जसोला डिस्ट्रिक्ट सेंटर के प्लॉट नंबर-2 पर हो रही कचरा डंपिंग की शिकायत के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पक्ष रखा है।डीडीए का कहना है कि वह नियमित सफाई कर रहा है, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के स्टे के कारण कुछ काम नहीं हो पा रहे हैं। डीडीए ने अपने हलफनामे में बताया कि प्लॉट का मालिकाना हक अभी कोर्ट में विवादित है और 2019 से उस पर स्टे लगा हुआ है। यह शिकायत स्प्लेंडर लैंडबेस कंपनी और अन्य लोगों ने की थी। उनका आरोप है कि जसोला मेट्रो स्टेशन से अपोलो अस्पताल तक की सड़क और संबंधित प्लॉट पर रोजाना अवैध रूप से कचरा और मलबा फेंका जाता है। डीडीए ने कहा कि कई बार स्थानीय लोग स्टाफ को काम नहीं करने के लिए रोकते हैं। इसको देखते हुए सरिता विहार थाने और डीसीपी को पत्र लिखकर बीट कांस्टेबल की तैनाती, रात में निगरानी और कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है।