बुराड़ी के भाटिया परिवार की वजह से एक बार फिर तंत्रमंत्र चर्चाओं में आ गया है। देश में लंबे समय से मानव बलि और तिलिस्म की दुनिया को लेकर कहानियां प्रचलित हुआ करती थीं। इनकी वजह से कई बार मासूम बच्चों की बलि तक दे दी गई। पिछले माह राजस्थान के एक व्यक्ति ने कबूला था कि रमजान के दौरान अल्लाह के लिए उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी थी।
वहीं वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति ने अपने परिवार की भलाई का हवाला देते हुए बेटे का सिर काट दिया था। कई बार महिलाओं को चुड़ैल होने के संदेह में प्रताड़ित किया जाता रहा है। अंधविश्वास के चलते मां-पिता कैसे अपने बच्चों की हत्या कर सकते हैं इस पर दिल्ली के इहबास निदेशक डॉ. निमेश देसाई का मानना है कि आध्यात्मिक प्रभाव में जीवन के कई निर्णय प्रभावित होते हैं , विशेष तौर पर हमारे जैसी संस्कृति में।
इनमें से कुछ परिवर्तन चरम सीमा के होते हैं जिनसे स्वयं या अन्य को नुकसान होता है। वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन रेशनलिस्ट एसोसिएशन (एफआईआरए) के अध्यक्ष नरेंद्रय नायक की मानें तो बलि का विचार तंत्रमंत्र के लिए नया नहीं है।
महाराष्ट्र में लंबे समय तक तंत्रमंत्र और अंधविश्वास को लेकर लड़ाई लडने वाले नरेंद्र डाभोलकर की हत्या 2013 में हुई थी। उसी दौरान महाराष्ट्र सरकार ने इसे लेकर कानून भी बनाया था। उनकी बेटी मुक्ता डाभोलकर का कहना है कि महाराष्ट्र को असम छोड़ अन्य किसी भी राज्य में अंधविश्वास के खिलाफ सरकारों ने सख्त कदम नहीं उठाए हैं। जबकि ऐसा करना बहुत जरूरी है।