गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर सभी पार्टियों में मतभेद और घमासान का दौर जारी है। आम आदमी पार्टी के बाद अब कांग्रेस में भी टिकट के अन्य दावेदारों ने खुलकर विरोध जताना शुरू कर दिया है।
यूपी में पहले चरण की चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद अब सारे प्रत्याशी जोरशोर से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। लेकिन पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी AAP अंदरूनी गुटबाजी से उबर नहीं पा रही है।
दिल्ली में AAP से करारी हार झेलने वाली कांग्रेस में भी गौतमबुद्घ नगर सीट पर टिकट के लिए बवाल बढ़ने लगा है। पार्टी का एक खेमा रमेश चंद्र तोमर की उम्मीदवारी से नाखुश है।
AAP में भी बगावत के सुर तेज
AAP में प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी के फैसले पर कुछ कार्यकर्ताओं ने रजामंदी जता दी है, लेकिन कई कार्यकर्ता अब भी विरोध में जुटे हैं। शुक्रवार को एक बार फिर पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई।
बैठक में प्रत्याशी के नाम को लेकर विरोधाभास की स्थिति बनी रही। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान प्रत्याशी बदलने की भी मांग उठी। इसके साथ ही कुछ नाम भी सुझाए गए हैं।
हालांकि AAP की जिला इकाई ने केपी सिंह को ही पार्टी की तरफ से फाइनल उम्मीदवार बताया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से प्रचार में जुटने की अपील की।
किसानों के साथ AAP ने किया धोखा!
बीते सालों में गौतमबुद्ध नगर में कई बड़े किसान आंदोलन हुए हैं जिसमें कई बार दिल्ली से आप के नेता किसानों के साथ खड़े हुए। दिल्ली में अन्ना के आंदोलन के दौरान कई बड़े किसान नेता भी वहां पहुंचे जिससे केजरीवाल की टीम भी खुश थी।
लेकिन आरोप है कि चुनाव के समय जब उन्हीं किसानों ने टिकट मांगा तो उन्हें नजरंदाज कर केपी सिंह को टिकट दे दिया गया। इतना ही नहीं, नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पार्टी के लिए जिन लोगों ने काम किया, उनको भी दरकिनार कर दिया गया।
पार्टी से जुड़े किसान नेता इस बात को मानते हैं कि जब उनको तवज्जो नहीं मिली है, तो वह भी साथ नहीं देंगे।
भट्टा पारसौल की आग में जलेगी कांग्रेस?
भट्टा पारसौल के प्रधान और आगरा के पूर्व सांसद ने अपने समर्थकों के साथ सोनिया गांधी के आवास पर विरोध प्रदर्शन किया। दोनों नेता और उनके समर्थकों का आरोप था कि पार्टी ने उनकी सीट पर सही उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया।
गौतमबुद्ध नगर से लोकसभा सीट के लिए आवंटित की गई टिकट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भट्टा पारसौल के प्रधान और उनके समर्थकों को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग भी किया।
प्रधान चंद्रभान सिंह मलिक ने रमेश चंद्र तोमर को टिकट दिए जाने पर विरोध करते हुए उन पर कई आरोप भी लगाए साथ ही तोमर का टिकट रद्द करने की मांग की।