आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने दिल्ली की सात में से पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है, पर दो सीटों पर अब भी पेच फंसा हुआ है। उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी दिल्ली सीट पर स्थानीय और बाहरी उम्मीदवार उतारने को लेकर पार्टी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। दोनों सीट पर पिछले दो लोकसभा चुनावों में पैराशूट उम्मीदवार पर ही पार्टी ने भरोसा जताया था। पार्टी ने दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन में जुटी है। संभावना है कि सात मार्च को उम्मीदवारों के नामों का एलान हो जाएगा।
दोनों सीटों के लिए प्रदेश भाजपा पदाधिकारी से लेकर, विधायक, पार्षद, पूर्व मेयर तक दावेदारी ठोक रहे हैं। पिछले दो लोकसभा चुनाव में उत्तर-पश्चिमी व पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा ने बाहरी उम्मीदवार को ही टिकट दिया था। पूर्वी दिल्ली की बात करें तो 2014 में महेश गिरी को टिकट मिला था तो 2019 के चुनाव में गौतम गंभीर को।
इसी तरह उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 2014 में डॉ. उदित राज को और 2019 में हंस राज हंस को चुनावी मैदान में उतारा था। दोनों ही बार चेहरे बदले गए थे। इस बार पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि कार्यकर्ता नाराज नहीं हो जाए। क्योंकि हर बार बाहरी उम्मीदवार को उतारने से कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाता है कि पार्टी ऐसे उम्मीदवार को उतारती है जिसे जीतने के बाद पांच साल तक स्थानीय समस्या से कोई सरोकार नहीं रहता है। फिर कैडर वोटरों के निराश होने का डर भी पार्टी को है।
पूर्वी दिल्ली सीट की दौड़ में प्रदेश भाजपा के कई पदाधिकारी शामिल है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर महामंत्री, उपाध्यक्ष, विधायक भी दौड़ में है। यही स्थिति उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की भी है। यहां से भाजपा नेता योगेंद्र चंदोलिया, कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुई प्रीता हरित, गुगन सिंह, पूर्व मेयर अवतार सिंह टिकट दावेदारी के दौड़ में शामिल हैं।