लोकसभा चुनाव में गुड़गांव सीट पर जातीय समीकरण हावी होने के आसार हैं। हालांकि, अब तक प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है। इसके बावजूद अंदरखाने ऐसे उम्मीदवारों की तलाश जारी है जो जातीय समीकरण में फिट बैठें।
गुड़गांव लोकसभा सीट पर मुस्लिम और अहीर वोट सर्वाधिक हैं। हर बार सभी दलों की कोशिश इनके बीच से उम्मीदवार लाने की होती है। मौजूदा सियासी हालात में बहुत कम राजनेता हैं जो सर्वमान्य हों। स्थिति यह है कि तीन जिलों में फैले गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में कुछ नेताओं का ही आना जाना है।
अहीर उम्मीदवार उतारने वाली पार्टियां इस फिराक में रहती हैं कि किसी तरह उन्हें मुस्लिम वोट मिल जाए। यही स्थिति मुस्लिम उम्मीदवार के साथ भी है। इस पैमाने पर राव इंद्रजीत सिंह, चौधरी जाकिर हुसैन और आफताब अहमद खरे उतरने वालों में शुमार होते हैं।
राव इंद्रजीत, रेवाड़ी के मूल वाशिंदे हैं और उनका गुड़गांव में आवास है। जबकि, पिछले लोकसभा चुनाव से उन्होंने मेवात में अपनी दिलचस्पी बढ़ा रखी है। यही हाल जाकिर हुसैन का है। वह मेवात के रहने वाले हैं, लेकिन रिहायश गुड़गांव में है और रेवाड़ी में इनका आना-जाना है।
इसके बावजूद उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। जाकिर के बाद परिवहन मंत्री आफताब अहमद हैं। हालांकि, कांग्रेस उनके अलावा भी कई और को भी विकल्प के रूप में देख रही है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार योगेंद्र यादव भी मेवात के रहने वाले हैं और अहीर कम्युनिटी से हैं।