देश की राजधानी दिल्ली में पूरा लोकसभा चुनाव 'मोदी बनाम केजरीवाल' के मुद्दे के इर्द-गिर्द हो सकता है। शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद भाजपा और आम आदमी पार्टी लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुट गई हैं। आम आदमी पार्टी केजरीवाल की गिरफ्तारी का भावनात्मक लाभ उठाने की कोशिश में है तो भाजपा लोगों के बीच जाकर यह प्रचारित करने की कोशिश कर रही है कि केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का अपना वादा निभाया है।
भाजपा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा मांग कर भी आम आदमी पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। रविवार को भी दिल्ली भाजपा ने राजधानी में जगह-जगह पर प्रदर्शन किया। दिल्ली सरकार और अरविंद केजरीवाल के विरोध में नारे लगाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह पर केजरीवाल का पुतला भी जलाया।
पूर्वी दिल्ली के गणेश नगर चौक पर अरविंद केजरीवाल का पुतला दहन करने के बाद दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने अमर उजाला से कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में जगह-जगह शराब की दुकानें खोलकर राजधानी के गरीबों-युवाओं और बच्चों को शराब के नशे में डुबाने का काम किया। जगह-जगह शराब की दुकानें खुलने से बहन-बेटियों का घर से निकलना दुर्लभ हो गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
पांडव नगर मंडल बीजेपी अध्यक्ष सोहन कुमार ने अमर उजाला से कहा कि देश के इतिहास में अरविंद केजरीवाल पहले मुख्यमंत्री हैं जो जेल जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं देने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर कर देगी क्योंकि यह दिल्ली वालों के लिए शर्म की बात होगी कि जेल में बंद व्यक्ति मुख्यमंत्री के रूप में काम करे और लोगों को यह बताना पड़े कि उनका मुख्यमंत्री जेल में बंद है।
भाजपा इन विरोध प्रदर्शनों में जल बोर्ड में हुई कथित अनियमितता, मुख्यमंत्री आवास के निर्माण में हुई धांधली, ई-बसों, स्वास्थ्य और शिक्षा में हुए कथित घोटालों की बात भी जनता के सामने रख रही है। यदि इन मुद्दों पर भी जांच आगे बढ़ती है तो आम आदमी पार्टी के नेता के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को अपने जीवन-मरण के प्रश्न के तौर पर देख रही है। वह जानती है कि यदि अरविंद केजरीवाल लंबे समय तक जेल में रह जाते हैं तो इससे न केवल उनकी साख पर असर पड़ेगा, बल्कि पार्टी को आगे बढ़ाने में भी मुश्किल आएगी। यह पार्टी के लिए भी अस्तित्व का प्रश्न बन सकता है। यही कारण है कि वह पूरे जोर-शोर के साथ इसे केंद्र सरकार का विपक्ष पर हमला बता रही है।
दोनों तरफ से चलाए जा रहे इन अभियानों का असर यह हो सकता है कि पूरा चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल के आसपास सिमट जाए। यदि ऐसा होता है तो मामला बहुत रोचक हो सकता है।