कांग्रेस-भाजपा के प्रत्याशी घोषित न होने से कार्यकर्ता असमंजस की स्थिति में हैं। दोनों ही पार्टियां सक्रिय रूप से प्रचार नहीं कर पा रही हैं। वहीं, कांग्रेस से संभावित गठबंधन की आस लिए आम आदमी पार्टी का चुनाव प्रचार तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कांग्रेस-आप के संभावित गठबंधन का असर कांग्रेस के प्रचार पर सबसे ज्यादा है। कांग्रेस प्रचार के मामले मे बुरी तरह से पिटी हुई है। कांग्रेस की ओर से एक भी सीट पर प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं होने से कांग्रेस कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस सीट पर उन्हें किस नेता के लिए प्रचार करना है।
हालत यह है कि कार्यकर्ता अपने घरों में बैठे हैं। केवल प्रदेश कार्यालय में ही कुछ गतिविधियां चल रही हैं। प्रदेश कार्यालय में कार्यकारी अध्यक्ष अपने स्तर पर जिलाध्यक्षों व ब्लाक अध्यक्षों से बैठक कर रणनीति तय करने में जुटे हैं।
कांग्रेस की रणनीति फिलहाल कागजों या बैठकों तक ही सीमित है। प्रदेश के नेताओं से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि पहले यह तो तय हो जाए कि हमें सातों सीटों पर लड़ना है या दो-तीन पर, वह भी किस सीट पर। इसी के बाद कार्यकर्ता और वह घरों से बाहर प्रचार के लिए निकल सकेंगे। बिना कारण घर-घर जाकर किसके लिए वोट मांगे।