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लोकसभा चुनाव 2019: वीवीआईपी सीट पर चुनाव का मुकाबला भी वीआईपी

Mon, 29 Apr 2019 08:31 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अजय माकन (कांग्रेस), मीनीक्षी लेखी (भाजपा) और बृजेश गोयल (आप) - फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे वीवीआईपी क्षेत्र नई दिल्ली में अबकी बार चुनावी मुकाबला भी वीआईपी होने वाला है। इसी सीट पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय माकन को पराजय का सामना करना पड़ा था। भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने उन्हें हरा दिया था। इस बार फिर दोनों आमने सामने हैं। इस बार यहां कांग्रेस से अजय माकन, भाजपा से मीनाक्षी लेखी, आम आदमी पार्टी से बृजेश गोयल और बसपा से सुशील वधेहरा उम्मीदवार हैं। साल 1952 से लेकर 2014 तक हमेशा इस सीट पर पांच या उससे ज्यादा उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ है। ऐसा पहली बार है जब चुनावी मैदान में  में चार उम्मीदवार उतरे हैं। 

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नई दिल्ली सीट पर सबसे ज्यादा बार भाजपा सांसद चुने गए हैं। इतना ही नहीं ज्यादातर सांसद लगातार दो बार सांसद रहे हैं। शायद यही वजह है कि पार्टी की ओर से एक बार फिर मीनाक्षी लेखी को चुनावी मैदान में उतारा है। 

21 सालों में पहली बार 2014 में हारे थे माकन 
साल 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव में अजय माकन को जीत मिली थी। इसके बाद से लगातार तीन बार वे विधानसभा चुनाव में जीते हासिल करते रहे। पार्टी में युवा नेता की छवि वाले अजय माकन को वर्ष 2004 में पहली बार कांग्रेस ने नई दिल्ली सीट से प्रत्याशी बनाया था। 2004 से 2014 तक माकन लगातार दो बार सीट से सांसद भी रहे।

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सुचेता कृपलानी, अटल बिहारी वाजपेयी, आडवाणी और राजेश खन्ना रहे हैं सांसद 

वर्ष 1952 में पहली बार इस सीट पर सुचेता कृपलानी सांसद बनी थीं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट से 1977 और 1980 में सांसद चुने गए थे। वहीं 1989 और 91 के चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी सांसद बने थे। जबकि 1992 में हुए चुनाव में फिल्मस्टार राजेश खन्ना ने जीत हासिल की थी। 

बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ाई
नई दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में पीने के पानी को लेकर काफी समस्या है। खासतौर पर नई दिल्ली के झुग्गी इलाकों में गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत हर साल देखने को मिलती है। सियासी गलियारों में पानी को लेकर काफी राजनीति भी होती आई है। यहां के लोगों की मुख्य समस्याएं पानी, सीवर, स्कूल इत्यादि हैं। 

दो हिस्सों में दिखाई दे रहे मतदाता
नई दिल्ली क्षेत्र के मतदाता चुनाव को लेकर दो हिस्सों में बंटे दिखाई दे रहे हैं। नौकरी पेशा से जुड़े लोग इस चुनाव को एक अलग ही दृष्टि से देख रहे हैं। जबकि बाकी राष्ट्र और पिछले 70 वर्षो की तुलना कर रहे हैं। इनके साथ कुछ वर्ग ऐसा भी है जो इस चुनाव को सीधे 1984 दंगा से जोड़ रहा है। 

सभी दस विधानसभा क्षेत्रों पर आप का कब्जा 

नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में 10 विधानसभा क्षेत्र हैं और सभी विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसी क्षेत्र की नई दिल्ली विधानसभा सीट से विधायक हैं। 

विधानसभा क्षेत्र
करोल बाग, दिल्ली कैंट, आरके पुरम, कस्तूरबा नगर, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली, पटेल नगर, मोती नगर, राजेंद्र नगर, मालवीय नगर।

कुल मतदाता : 14,90,147
पुरुष मतदाता : 8,30,322
महिला मतदाता : 6,59,749
अन्य  : 76
2014 में पड़ा वोट 65.08 फीसदी। 
सरकारी नौकरीपेशा 16.31 फीसदी। 
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जातीय समीकरण

पंजाबी 16.58 फीसदी
एससी 15.80 फीसदी 
ओबीसी 14.28 फीसदी। 
जाट 2.8 फीसदी 
ब्राह्मण 6.28 फीसदी 
वैश्य 8.45 फीसदी
मुस्लिम 2.24 फीसदी 
गुर्जर 2.21 फीसदी

(नोट : राजनीतिक दलों की ओर से जुटाए आंकडे़ )

विधानसभा क्षेत्र में काम करने वाला फैक्टर
- मोती नगर और पटेल नगर में सिख फैक्टर। 
- मालवीय नगर में जाट और पंडित फैक्टर। 
- आरकेपुरम और ग्रेटर कैलाश में जाट फैक्टर। 
- पटेल नगर और करोल बाग में एससी व पंजाबी फैक्टर। 
- दिल्ली कैंट : सैनिक, नौकरीपेशा और गुर्जर फैक्टर
- मालवीय नगर में मुस्लिम फैक्टर भी। 
- राजेंद्र नगर में दक्षिणी भारतीय, यादव और वैश्य फैक्टर। 
- नई दिल्ली में सभी सरकारी नौकरीपेशा वालों का फैक्टर। 

2014 में किसको कितने वोट मिले 
मीनाक्षी लेखी 
भाजपा   4,53,350
आशीष खेतान 
आप     2,90,642
अजय माकन 
कांग्रेस   1,82,893
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