पूरे देश की सत्ता की केंद्र दिल्ली कई मायनों में देश को आगे बढ़ने की दिशा दिखाने वाली होती है, लेकिन जब मतदान की बात आती है तो यह ठिठक जाती है। इस बार भी दिल्ली में अपेक्षाकृत कम मतदान होने की खबर है। लोकतंत्र के महापर्व में रविवार को दिल्ली फर्स्ट डिवीजन मुश्किल से पास हुई है। सातों सीटों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो गया है। कई मतदान केेंद्र पर मतदाताओं की लंबी लाइन लगी रही। देर शाम तक 60.2 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव के 65 फीसदी की तुलना में इस बार का मत प्रतिशत कम रहा।
दिल्ली में मतदान कम क्यों
आंकड़े बताते हैं कि 1977 के बाद हुए चुनाव में दिल्ली ने अब तक का सबसे ज्यादा 71.31 फीसदी का मतदान किया था। उसके बाद फिर कभी वह इस आंकड़े तक पहुंच नहीं पाई। यहां तक कि लोकसभा 2014 के मोदी वेव वाले चुनाव में भी दिल्ली ने महज 65.10 फीसदी मतदान ही किया था।
दिल्ली में अपेक्षाकृत बहुत तेज मतदान नहीं होता रहा है। इस बार का ट्रेंड भी उसी के अनुरुप आता दिख रहा है। माना जाता है कि अपेक्षाकृत निम्न कालोनियों के लोग ज्यादा संख्या में वोट करने के लिए आगे आते हैं, लेकिन उच्च वर्ग के लोग मतदान से दूर ही रहते हैं जिसके कारण दिल्ली में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम ही रहता है।
भाजपा नेता ने कहा
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मतदान के बाद दिल्ली की सातों सीटों पर लगातार दूसरी बार भी जीत हासिल करने का विश्वास जताया। लगातार जागरुकता पैदा करने के बाद भी दिल्ली में मतदान ज्यादा न होने के सवाल पर तिवारी ने कहा कि इस बार काफी अधिक संख्या में लोग मतदान करने सामने आए हैं, लेकिन अंतिम आंकड़े आने तक उन्हें मतदान के बढ़ने का भरोसा है।
किस सीट पर कितनी वोटिंग
चांदनी चौक- 62.67 फीसदी
उत्तर-पूर्वी- 63.41 फीसदी
पूर्वी दिल्ली- 61.95 फीसदी
नई दिल्ली- 56.90 फीसदी
उत्तर- पश्चिमी- 58.99 फीसदी
पश्चिमी दिल्ली- 60.64 फीसदी
दक्षिणी दिल्ली- 58. 59 फीसदी