रिंग रेल बस वादों के ट्रैक पर दौड़ती रही। 1975 में दिल्ली में रिंग रोड के समानांतर रिंग रेल की पटरी बिछाई गई थी। 1982 में एशियाई खेलों के दौरान इस नेटवर्क पर कुल 36 लोकल ट्रेनें चलने लगी थीं।
दिल्ली की रिंग रेल पूर्ण राज्य के दर्जे की तरह वादों के ट्रैक पर ही अब तक दौड़ रही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान सभी सियासी दलों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसका वादा तो जरूर किया लेकिन अब तक दिल्ली की लाइफ लाइन नहीं बन सकी। राजधानी में दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क बढ़ता गया, नमो रेल भी चल निकली पर जनता को अब भी रिंग रेल का इंतजार है। दरअसल दिल्ली वालों को इसकी आवश्यकता इसलिए भी है कि यह एक कोने से दूसरे कोने को जोड़ेगी।
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35 किलोमीटर लंबा रिंग रेल नेटवर्क दिल्ली ही नहीं फरीदाबाद, पलवल, गाजियाबाद व अन्य शहरों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह लाभदायक साबित हो सकता है। क्योंकि रिंग रेल पर छोटे स्टेशनों के साथ ही नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन जैसे बड़े स्टेशन स्थित हैं।
इसी तरह इसके करीब 21 रेलवे स्टेशन से दिल्ली मेट्रो की भी कनेक्टिविटी है। उपलब्ध आधारभूत ढांचे को अगर विकसित किया जाता है तो एनसीआर के लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनने से इस ट्रैक पर मालगाड़ियों का भी बोझ जल्द ही कम हो जाएगा।
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रिंग रेल नेटवर्क की राह में कई बाधाएं
हजरत निजामुद्दीन से चलकर हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली रिंग रेल नेटवर्क पर 21 स्टेशन है। चारों तरफ आवासीय कॉलोनी व कार्यालय मौजूद है। ट्रेन चलती भी है तो 80 प्रतिशत सीटें खाली रहती हैं। साढ़े तीन हजार लोग ही इस नेटवर्क पर यात्रा करते हैं। स्टेशन पहुंचने और स्टेशन से अन्य जगह जाने के लिए सार्वजनिक वाहनों की उपलब्धता नहीं है। मुख्य सड़क से स्टेशनों को जोड़ने वाली सड़कों का अभाव है।
स्टेशन व रेलवे लाइन के आसपास अवैध झुग्गियां भी समस्या है। अपराधी ट्रेन में अपराध कर झुग्गियों में छिपने का भी मामला सामने आता रहता है। इससे यात्री अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं।
सुझाव भी परवान नहीं चढ़ा
रेल प्रशासन ने कई वर्ष पहले दिल्ली परिवहन विभाग को मेट्रो फीडर की तर्ज पर रिंग रेल फीडर बस सेवा चलाने का सुझाव पेश किया था। इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ।
2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेल से पहले रिंग रेल सेवा को बेहतर बनाने को लेकर काफी चर्चा हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी में इस मुद्दे पर बातचीत हुई। नतीजा सिफर रहा।
2015 में तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने आवश्यकता पर जोर दिया था।
2016 में दिल्ली सरकार के तत्कालीन परिवहन मंत्री गोपाल राय ने तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मिलकर रिंग रेल के विकास की मांग प्रदूषण की समस्या को देखते हुए की थी।
रेलवे ने भी एक समिति इसे लेकर गठित की थी, सरकार के साथ समन्वय भी बनाया था, बात आगे नहीं बढ़ी।
2018 में दिल्ली के सभी सातों सांसदों ने तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर रिंग रेल को विकसित करने की मांग की थी।
रेलवे का कहना था कि अतिरिक्त पटरी बिछाने के लिए स्टेशनों व पटरी के आसपास से अतिक्रमण हटाना जरूरी है।
दिल्ली सरकार के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है।
2016 के बजट में रिंग रेल को विकसित करने की घोषणा के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राइट्स से इसे लेकर अध्ययन कराया गया था।
ट्रेन चलती भी है तो खाली
रिंग रेल पर ट्रेन चलती भी है तो सवारी नहीं मिलती। वादा तो हर चुनाव में किया जाता है लेकिन स्टेशन से अन्य जगह जाने के लिए सार्वजनिक वाहनों की उपलब्धता में कोताही बरती जाती है। सुनसान सड़कों पर सुरक्षा नदारद रहती है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए सुविधा तक नहीं है। अवैध झुग्गियां खतरे की घंटी बजाती रहती है। मेट्रो रेल के युग में रेलवे की तरफ से कम संख्या में चलने वाली ट्रेन की वजह से लंबा इंतजार करना पड़ता है। लोकल ट्रेनों की रफ्तार भी ऐसी कि समय पर पहुंचना मुश्किल होता है।
रिंग रोड के समानांतर बनी थी
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आम पैसेंजर ट्रेनों के आवागमन में कोई दिक्कत ना आए इसे ध्यान में रख 1975 में दिल्ली में रिंग रोड के समानांतर रिंग रेल की पटरी बिछाई गई थी। मालगाड़ी चलाने की शुरुआत के साथ ही 1982 में एशियाई खेलों के दौरान इस नेटवर्क पर कुल 36 लोकल ट्रेन चलने लगी थी। अब प्रतिदिन पांच जोड़ी ट्रेनें चलती हैं। वह भी अधिकांश खाली रहती है। प्रतिदिन इस ट्रैक से 70 मालगाड़ियां गुजरती हैं।
इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल की नीति में भी नहीं है शामिल
आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि एक ही जगह से लोगों को मेट्रो, रेल, बस, ऑटो समेत अन्य यातायात के संसाधन मिल सके। इनमें मेट्रो स्टेशनों को रेलवे स्टेशनों व बस स्टैंड से जोड़ने की कोशिश भी चल रही है। रिंग रेल के सभी स्टेशनों को भी इससे जोड़ दिया जाए तो दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अन्य शहरों से आने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिल सकेगा। रिंग रेल नेटवर्क पर स्थित 21 रेलवे स्टेशनों में सराय रोहिल्ला, दयाबस्ती, किशनगंज, सदर बाजार, नई दिल्ली, शिवाजी ब्रिज, तिलक ब्रिज, प्रगति मैदान, निजामुद्दीन, लाजपत नगर, सेवा नगर, पटेल नगर, कीर्ति नगर, नारायणा विहार, इंद्रपुरी, बराड़ स्क्वायर, सरदार पटेल मार्ग, चाणक्यपुरी, दिल्ली सफदरजंग, सरोजनी नगर और लोदी काॅलोनी शामिल हैं।