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आज तय होगा कांग्रेस और आप का राजनीतिक भविष्य, जनाधार बढ़ा तो विधानसभा का रास्ता होगा आसान

Thu, 23 May 2019 05:15 AM IST
देव कश्यप विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की राजनीति की गति आज तय हो जाएगी। लोकसभा के नतीजे आने के साथ ही दोनों ही पार्टियों का भविष्य भी काफी हद तक तय हो जाएगा। भाजपा मैदान में पहले नंबर पर जरूर है आप सत्ता में बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है वहीं कांग्रेस एक बार फिर से अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। दिल्ली में यदि भाजपा सभी सातों सीटें जीतती है तो आप के कई असंतुष्ट विधायक कमल का दामन थाम सकते हैं। भाजपा पहले ही कह चुकी है कि आम आदमी पार्टी के कई विधायक उसके संपर्क में है। दो विधायक तो चुनावों के दौरान ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। 

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दिल्ली के परिणाम के लिहाज से देंखें तो यह भाजपा से ज्यादा कांग्रेस-आप के लिए ज्यादा अहम है। 2014 के चुनावों में मोदी लहर के चलते कांग्रेस के चार दिग्गजों जयप्रकाश अग्रवाल, कृष्णा तीरथ, महाबल मिश्रा व रमेश कुमार की जमानत जब्त हो गई थी। सभी सातों सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे थे। केंद्र सरकार में रहने वाली कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका था। वर्तमान में कांग्रेस ने सभी सातों सीटो पर अपने दिग्गजों को फिर से मैदान में उतार कर खोई प्रतिष्ठ हासिल करने का दांव लगाया है। इतना ही नहीं कांग्रेस की निगाहें फरवरी 2020 में होने वाली विधानसभा चुनावों पर भी है। ऐसे में यदि कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरता है तो उसके लिए शुभ संकेत होगा वरना कांग्रेस जल्द वापसी करना मुश्किल हो जाएगी। 

आम आदमी पार्टी पिछले चुनावों में हालांकि सभी सीटें हार गई थी लेकिन उसके सभी प्रत्याशि अच्छे वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। आम आदमी पार्टी मोदी लहर का मुकाबला नहीं कर पाई थी। वर्तमान में दिन प्रति दिन जिस प्रकार के आप के विधायकों में असंतोष पनपता गया और कई विधायक खुलेआम पार्टी के विरोध में काम करने लगे उससे पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं केंद्र के साथ हर-रोज की लड़ाई से भी आप की प्रतिष्ठा को आघात लगा है। इसके अलावा जिस प्रकार से कांग्रेस ने तेजी से अपना खोया जनाधार वापस पाया है वह आप के लिए खतरे की घंटी है।
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आप के दो विधायक को चुनावों के दौरान भाजपा में शामिल हो चुके है। कपिल मिश्रा खुलेआम भाजपा के प्रचार में लगे रहे। चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा भी नाराज हैं और कांग्रेस में उनके लिए रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा भी करीब एक दर्जन विधायक लाइन मेें हैं।

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