कोरोना वायरस के उपचार में जापान की दवा फेविपिराविर को आपात स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद पहली बार देश के किसी अस्पताल ने इस पर रोक लगाई है। दिल्ली के लोकनायक अस्पताल ने कोरोना मरीजों में दुष्प्रभाव मिलने के चलते दवा पर रोक लगा दी है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मरीजों में कई तरह के दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। उनमें भूख की कमी, जी मिचलाना, डायरिया, यूरिक एसिड और एएसटी/एएलटी का बढ़ना और न्युट्रोफिल काउंट का घटना आदि शामिल हैं।
पहली बार 1800 और फिर सात से 14 दिन तक रोजाना 800 एमजी दवा की डोज दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही दवा की जितनी डोज बताई गई उतनी मरीजों को दी गई थी। कई तरह के दुष्प्रभाव मिलने के चलते इसके इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी है।
एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हाल ही में डॉ. एमके डागा की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें कोरोना मरीजों के उपचार में शामिल दवाओं पर समीक्षा की गई। इस दौरान दवाओं के इस्तेमाल को लेकर अस्पताल ने खुद की गाइडलाइन भी बनाई हैं।
इनके अनुसार फेविपिरावीर दवा को उपचार में शामिल नहीं किया है, जबकि रेमीडेसिविर, आइवरमैक्टिन, टोसिलिजूमैब आदि को अनुमति दी गई है। इसी में प्लाज्मा थेरेपी भी शामिल है। इस दौरान अस्पताल के बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यू झाम्ब, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मुनिश अग्रवाल, मेडिसिन विभाग के डॉ. संदीप गर्ग आदि मौजूद रहे।
डॉक्टरों के अनुसार फेविपिराविर दवा का इस्तेमाल कम मरीजों पर ही हुआ है, लेकिन जिन मरीजों को ये दवा दी गई उनके अनुभव के आधार पर अस्पताल ने इस दवा के इस्तेमाल पर रोक लगाई है।