लॉकडाउन के बाद इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबानों का जीवन भी प्रभावित हुआ है। इसमें पालतू पशुओं से लेकर लावारिस पशु भी शामिल हैं। इन्हें खाना न मिलने से जीवन का संकट खड़ा हो गया है।
लॉकडाउन होने से आवाजाही बंद है और सड़क पर घूमने वाले बंदर, कुत्ते, बिल्ली व गायों समेत अन्य पशुओं को खाना नहीं मिल रहा है क्योंकि पहले लोग घरों से निकलकर इन तक भोजन पहुंचाते थे।
दुकानों पर नहीं पहुँच रहा पशुओं का खाना
लॉकडाउन लागू होने से पशुओं के खाने की दुकानों पर आपूर्ति प्रभावित हुई है और दुकानों पर पिछला स्टॉक खत्म हो गया है। ऐसे में पालतू पशुओं के सामने भी खाने की परेशानी है। शाहदरा स्थित पशुओं के खाने की दुकान चलाने वाले गोपाल ने बताया कि सप्लाई बंद है और ग्राहकों के फोन आने के बावजूद भी उन तक खाना नहीं पहुंचा पा रहे हैं। वहीं, पशु प्रेमी भी अपने पशुओं को लेकर खासा चिंतित हैं।
एक अन्य पशु प्रेमी आदित्य ने बताया कि उनके पास रॉटविलर प्रजाति का कुत्ता है जो शुरू से ही बाहर के खाने पर निर्भर है। ऐसे में अब उनके पास बाहर के खाने का कम ही स्टॉक बचा है। इस वजह से उन्हें चिंता है कि स्टॉक स्टॉक खत्म होने के बाद वह अपने कुत्ते को क्या खिलाएंगे। ऐसे में लोगों की मांग है कि जिस प्रकार सरकार ने इंसानों के लिए खाने पीने की वस्तुओं की आपूर्ति चालू रखी है, उसी तरह पशुओं के खाने की सप्लाई भी नहीं रुकनी चाहिए।
पशु क्लीनिक बंद होने से और बढ़ी मुश्किल
वर्षों से लावारिस कुत्तों को भोजन देने वाली नेहा खन्ना ने बताया कि लॉकडाउन के बाद पशुओं का क्लीनिक भी बंद हो गया है। ऐसे में बीमार पशुओं को जरूरी दवा तक नहीं दी जा रही है। वहीं, पशु क्लीनिक भी नहीं खुल रहे हैं। इस वजह से इन बेजुबानों का इलाज प्रभावित हो रहा है। नेहा ने कहा कि सरकार को पशु क्लीनिक को खोलना चाहिए जिससे किसी बेजुबान की जान न जाए।