मायापुरी इलाके में हुई सीलिंग को लेकर यहां के स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि आज सभी को प्रदूषण की याद आ रही है लेकिन जब हमें यहां
स्थानांतरित किया गया था उस समय इसपर विचार क्यों नहीं किया गया। लोगों के मुताबिक वर्ष 1971 में मोतियाखान कबाड़ी बाजार को मायापुरी में स्थानांतरित किया
गया था। यहां काम करने वालों ने बताया कि हजारों परिवारों की रोजी रोटी यहां पर हो रहे काम से चलती है। ऐसे में एकाएक सीलिंग करने से लोगों का काम धंधा ठप
हो जाएगा।
यहां काम करने वाले दुकानदार रमनदीप ने बताया कि वह चालीस साल से ज्यादा समय से यहां काम कर रहे हैं। उनके काम से ज्यादा प्रदूषण नहीं फैल रहा है। हमलोगों
के लिए उचित व्यवस्था किए बिना सीलिंग के आदेश दे दिए गए। अब ऐसी स्थिति में हम कहां जाएंगे। गुरुप्रीत ने कहा कि यह कबाड़ के कारोबार को बंद करने का
आदेश है। यहां काम करने वाले हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके लिए कौन जिम्मेवार है। जब तक हमलोगों के लिए उचित व्यवस्था नहीं होगी तब तक सीलिंग
करना बेमानी है।
गुरचरण सिंह ने बताया कि अतिक्रमण के नाम पर निगम लगातार दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करती रहती है। पिछले कुछ दिनों में निगम की ओर से चालीस ट्रक
सामान इस इलाके से जब्त कर लिया गया। हम सभी दुकानदार सामान को दुकान के भीतर ही रखते हैं। कुछ देर के लिए ट्रक को दुकान के बाहर खड़ा किया जाता है
और फिर सामान उतारकर उसे हटा दिया जाता है। ऐसे में हमलोग कैसे व्यवसाय कर पाएंगे।