नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने एक्युट लिवर फेलियर के बाद एक पांच माह की बच्ची को नई जिंदगी दी है। डॉक्टरों ने कोलकाता निवासी बच्ची अरियाना डे का लिवर प्रत्यारोपित कर दिया। बच्ची को जन्म के कुछ रोज बाद पीलिया हो गया। चार माह बाद उसे फिर यह समस्या हुई। यूरिन के रंग में बदलाव के साथ आंखों पर भी बीमारी का असर दिखने लगा।
कई अस्पतालों में सलाह लेने के बाद भी समस्या नहीं सुलझी। बच्ची के होंठ से रक्त बहने लगा तो आपात स्थिति में उसे मैक्स अस्पताल लाया गया। यहां जांच में एक्युट लिवर फेलियर का पता चला। डॉक्टरों के अनुसार, इतनी कम आयु में इस रोग का मामला उन्होंने पहली बार देखा है। इसके बाद मां से लेकर करीब 182 ग्राम का लिवर प्रत्यारोपित किया गया। 22 दिन निगरानी के बाद अब बच्ची स्वस्थ है।
अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टर. सुभाष गुप्ता ने बताया कि देश में पहले भी कम आयु के बच्चों के लिवर प्रत्यारोपित हुए हैं, लेकिन एक्युट लिवर फेलियर का यह पहला मामला हो सकता है। लाखों में से किसी एक बच्चे को इस तरह की दिक्कत होती है। कोलकाता के डॉक्टरों ने इसके इलाज से हाथ खींच लिया था। यहां भी फैसला लेने के लिए समय कम था।
इसलिए महज 18 घंटे में तमाम जांच और कागजी कार्यवाही के बाद परिजनों से मंजूरी लेकर सर्जरी शुरू की गई। डॉ. शरत वर्मा का कहना है कि 1 वर्ष से कम आयु के बच्चों में लिवर की परेशानी काफी कम होती है। फिलहाल आरियाना स्वस्थ है। आरियाना की मां श्यान्तनी डे ने कहा कि कई डॉक्टर तो इसके लिए दूध की बोतल और गलत स्तनपान को ही दोष दे रहे थे।