नोएडा सेक्टर-58 थाने की छत्रछाया में एक दर्जन फूड कॉर्नर अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। कुछ दुकानों की तो छत भी थाने के सहारे चल रही है। थाने कीदीवार पर शेड डालकर बाकायदा अतिक्रमण कर दुकानें चलाई जा रही हैं और पुलिस इससे बेखबर हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। थाने के सामने सड़क पर लोग गाड़ियां पार्क कर मनमर्जी तरीके से खाते-पीते हैं। इतना ही नहीं यहां खुलेआम शराब भी पी जाती है। इससे लगता है जैसे सेक्टर-58 पुलिस की नजर में अतिक्रमण करना कानूनन गलत नहीं है या फिर पुलिस ऐसे दुकानदारों से मोटी रकम वसूलती है।
शाम ढलते ही खुल जाते हैं शराब के ‘अड्डे’
थाने के सामने फास्ट फूड के एक दर्जन स्टॉल अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। शाम ढलते ही इन दुकानों पर भीड़ जुटती है। नियम व कानून को ताक पर रखकर लोग सड़क के बीच में गाड़ियां खड़ी कर देते हैं और वहां खड़े होकर शराब पीते हैं। कार के भीतर तेज आवाज में म्यूजिक चलाया जाता है। कभी-कभी लोग शराब पीकर हुड़दंग भी करते हैं लेकिन पुलिस के कान पर जू तक नहीं रेंगती। देर रात 3 बजे तक यह फूड कॉर्नर खुले रहते हैं और सड़क पर हुड़दंगियों का कब्जा रहता है।
अतिक्रमण करने वालों की पहुंच ऊपर तक
थाने के सामने फूड कॉर्नर वाले अपनी पहुंच सीधे ऊपर तक होने की धमकी देते हैं। कई बार तो पुलिसकर्मियों को भी ऐसी धमकी मिल जाती हैं। बताया जाता है कि प्रत्येक दुकान पुलिस के संरक्षण से ही चल रही है। कुछ फूड कॉर्नर के मालिक तो अपनी पहुंच सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख नेताओं तक होने की बात भी बताते हैं।
उगाही के साथ ही पगड़ी भी देनी होती है
पुलिस दुकानदारों से महीने की उगाही के साथ ही एकमुश्त पगड़ी भी वसूलती है। दुकान लगाने से पहले पुलिस उस दुकानदार या रेहड़ी वाले से पगड़ी के रूप में एकमुश्त रकम ले लेती है और उसके बाद उनसे महीना या हफ्ता भी वसूला जाता है।
सेक्टर-58 थाने के सामने अतिक्रमण कर दर्जनों दुकानें चलाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बहुत जल्द अवैध रूप से दुकान चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अनूप कुमार, डीएसपी
इस शहर में कानून व्यवस्था की हालत जगजाहिर है। यहां पगड़ी लेकर पुलिस दुकानें लगवाती है। अतिक्रमण कराया जाता है। पुलिस व प्राधिकरण मिलकर खुला खेल करते हैं।
- डॉ. सीबी झा, अध्यक्ष, अट्टा मार्केट एसोसिएशन
सेक्टर-58 थाने के सामने शराब का अड्डा बनाकर रात भर अवैध दुकानें चलाई जा रही हैं। मैंने प्राधिकरण अधिकारियों को वहां का दौरा भी कराया है। उन्होंने दुकानों को हटाने का निर्देश दिया था, मगर एक माह बाद भी हालत वैसी ही है।
- विपिन मल्हन, अध्यक्ष, एनईए