दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह के घर सोमवार को सास और बहू का फुल फैमिली ड्रामा चला। अंदर बहू रोते हुए पति सोमनाथ भारती व सास मनोरमा के जुल्म व प्रताड़ना की कहानी सुना रही थी तो सड़क पर सास रोते हुए बेटा का घर बसाने के लिए खुद वृद्धाश्रम में रहने की दुहाई दे रही थी।
बरखा शुक्ला सिंह के सफदरजंग एन्क्लेव के बी ब्लॉक घर में दोपहर ढाई बजे ड्रामा शुरू हुआ। इस दौरान बाहरी लोगों के आने के चलते बरखा का घर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
सोमनाथ भारती के दो दिन पहले ट्वीट में पांच सालों से कोई रिश्ता नहीं... के विरोध में लिपिका ने मीडिया को बुलाकर सवाल उठाया कि बच्चों और मुझे अपने रिश्ते को साबित करना पड़ेगा? भारती ने विधानसभा चुनाव के दौरान जो भी बैंक, होम लोन, कार, कैश, ज्वेलरी आदि की जानकारी दी है, वह बिल्कुल गलत है। क्योंकि मुझसे बिना पूछे दिया है।
मेरे मामले में क्यों चुप हैं केजरीवाल
लिपिका ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस व महिला मामले पर केजरीवाल ने सुरक्षा व अधिकारों पर बयान दिया था, लेकिन मेरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। जबकि विश्वास के मुद्दे पर कहा कि हमारे परिवारों को बख्श दें।
क्या भारती से मेरा रिश्ता उनकी नजर में कुछ नहीं था। उन्हें इस मामले पर भारती को समझाना चाहिए था। लिपिका ने कहा कि शिकायत के बाद मेरा सोसायटी में रहना मुश्किल कर दिया गया है।
भारती बेहद ही स्मार्ट हैं..इसलिए मुझे स्वयं न आकर लोगों से तंग करवा रहे हैं। मुझे अब सिर्फ अपने बच्चों के साथ अलग रहना है।
वकीलों के साथ मनोरमा बहू से मिलने पहुंची
अंदर लिपिका मीडिया के सामने अपना दर्द बयां कर रही थी तो बाहर वकीलों के साथ सास मनोरमा पहुंच गई। मनोरमा बरखा शुक्ला सिंह को ज्ञापन (उससे पहले दिल्ली महिला आयोग मुख्यालय में अपना ज्ञापन रिसीव करवाकर आई थीं) देने पहुंची थी।
मनोरमा का कहना था कि यह जानकर बेहद पीड़ा हुई कि बेटे के साथ रहने के कारण बहू अलग रह रही है। उसके आरोप तथ्यों से परे हैं। मैं 67 वर्ष की बुजुर्ग महिला इन आरोपों के साथ अपने आखिरी दिनों को नहीं गुजारना चाहती।
यदि मेरी बहू अपने पति के साथ रहकर खुश है तो मैं वृद्धाश्रम में रहने को तैयार हूं। लेकिन आयोग अध्यक्ष से जो भी बात करनी है आयोग में आएं, यह मेरा घर है कोई धर्मशाला नहीं। इसके अलावा बहू से मिलना है तो द्वारका जाएं, यहां नहीं।
घरेलू हिंसा मामले में लिपिका का कहना है कि बेशक भारती ने अपनी मां की शह पर सब जुल्म किए लेकिन उन्हें मनोरमा (सास) से कोई शिकायत नहीं है। क्योंकि उनकी वे सीनियर सिटीजन हैं और मेरी मां जैसी हैं।
पांच महीने की बेटी के साथ घर आने से रोका
शादी के बाद मुझे भारती की हकीकत पता चली, लेकिन परिवार और संस्कारों के चलते मैंने समझौता कर लिया। इसी बीच गर्भवती हो गई, लेकिन तनाव के चलते डायबिटिक व हाइपरटेंशन की मरीज बन गई।
मुझे दिन में चार बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगता था। हालांकि मैं बाद में अपने पेरेंट्स के घर चली गई। पांच महीने की बेटी को लेकर ससुराल पहुंची पर सास ने अंदर नहीं आने दिया।
बेटी के साथ गेट पर खड़ी थी तो सोमनाथ के भाई ने कहा कि यह तुम्हारा घर नहीं है, मां के नाम है। यह पूरी कहानी वसंत विहार थाने में भी दर्ज है।