उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार तिराहा के पास बने दो निजी स्कूलों को भी दंगाइयों ने हिंसा का शिकार बनाया। यही नहीं एक दूसरे से सटकर बने राजधानी स्कूल की तीसरी मंजिल से रस्सी के सहारे डीआरपी स्कूल में उतर उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ करने के साथ स्कूल को आग के हवाले कर दिया।
डीआरपी स्कूल के मालिक धर्मेश ने बताया कि दंगाइयों ने सबसे पहले बराबर में बने राजधानी स्कूल पर कब्जा किया। तोड़फोड़ करते हुए वे लोग स्कूल की तीसरी मंजिल पर चढ़ गए और हमारे स्कूल में भी पत्थर बरसाने शुरू कर दिए थे। यह देख चौकीदार स्कूल का मुख्य गेट बंद कर अपनी जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल की ओर भागा।
दंगाई लगातार हमारे स्कूल की दीवार पर पत्थर बरसा रहे थे। वहीं, जब उनसे गेट नहीं खुला तो उन्होंने बराबर वाले स्कूल की दीवार से रस्सी डाल दी। जिसके बाद भारी संख्या में दंगाई डीआरपी स्कूल में उतर गए। दंगाइयों ने उतरते ही स्कूल में तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। साइंस लैब समेत अन्य लैब व कक्षाओं को भी आग के हवाले कर दिया।
दंगाई यहां से एलसीडी स्क्रीन समेत अन्य सामान लूट ले गए। धर्मेश ने बताया कि घटना वाले दिन हालात खराब होते देख समय से पहले ही बच्चों के अभिभावकों को फोन कर बच्चों को ले जाने की सूचना दे दी थी। हालांकि, रविवार को स्कूल की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है।
अरुण मार्डन पब्लिक स्कूल में जला दी हजारों किताबें
ब्रजपुरी रोड स्थित अरुण मार्डन पब्लिक स्कूल को भी दंगाइयों ने निशाना बनाया। स्कूल के मालिक व पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने बताया कि दंगाइयों ने स्कूल में खड़ी बसों को जलाने के साथ पिछले 30 साल का रिकॉर्ड समेत हजारों किताबों को भी आग के हवाले कर दिया है। दीवारों को भी तोड़ा गया है। स्कूल को ठीक करवाया जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई ज्यादा दिनों तक प्रभावित न हो।
उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की और जेवर लूट ले गए
नूर इलाही इलाके में उपद्रवियों ने हिंसा के दौरान लोगों के घर में न केवल तोड़फोड़ की बल्कि लूटपाट कर फरार हो गए। घर के मालिक का आरोप है कि उपद्रवियों ने एक समुदाय को निशाना बनाया है। इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए वह परिवार समेत एक दिन पहले ही अपना मकान बंद कर रिश्तेदार के घर चले गए थे। अगले दिन उस इलाके में उपद्रवियों ने जमकर हिंसा की।
37 वर्षीय मंसूर अली (37) ने बताया कि वह अपने और जीजा फैजूल के परिवार के साथ मोहनपुरी इलाके में किराए के मकान में रहते हैं। उनका रामगली में सिलाई व कढ़ाई का कारोबार है। यह इलाका नूर इलाही से सटा हुआ है। सोमवार को तनाव को देखते हुए वह अपने परिवार के साथ रिश्तेदार के घर चले गए।
अगले दिन शाम करीब 4 बजे उपद्रवियों ने दूसरी मंजिल पर स्थित उनके घर पर धावा बोल दिया। गेट पर लगे ताले को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन तोड़ नहीं पाए। उसके बाद दरवाजे को तोड़कर घर के भीतर गए और करीब 20 तोला सोना लूट ले गए।