दिल्ली में कोरोना की स्थिति लगातार बिगड़ती देख उपराज्यपाल अनिल बैजल ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है, जो राजधानी में कोरोना से जुड़े मामलों पर अहम सुझाव देगी।
आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बलराम भार्गव के नेतृत्व में बनी इस छह सदस्यीय टीम में एम्स अस्पताल के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया भी शामिल हैं।
टीम का गठन ऐसे समय में किया गया है, जब दिल्ली सरकार को राजधानी में कोरोना के मामलों पर सही कदम न उठा पाने के लिए सर्वोच्च अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट से कड़ी फटकार खानी पड़ी है।
इसके पहले दिल्ली सरकार के अस्पताल एलएनजेपी में कथित तौर पर कोरोना शवों के साथ उचित व्यवहार न किये जाने के मामले में सर्वोच्च अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है।
इसके पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा था कि राजधानी दिल्ली में कोरोना की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और दिल्ली कोरोना कैपिटल बनने की राह पर आगे बढ़ रही है। माननीय जजों ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब भी किया है।
दिल्ली सरकार को कोरोना के मोर्चे पर घिरता देख भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकार पर हमलावर हो उठी हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल सरकार केवल बातें करती रह गई, जबकि कोरोना ने दिल्ली को अपनी जकड़ में लेती चली गई।
दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह साफ हो जाता है कि केजरीवाल सरकार स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उन्हीं मसलों को उठाया है, जिन्हें वे लगातार उठाते आ रहे हैं। दिल्ली सरकार केवल अपने प्रचार में लगी हुई है जबकि कोरोना के कारण दिल्ली की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।
इसके पहले दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच में राजधानी से जुड़े फैसले लेने के मामले में कई बार टकराव होते रहे हैं। हाल ही में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार का फैसला पलटते हुए दिल्ली में देश के किसी भी राज्य के नागरिक को इलाज कराने का अधिकार दे दिया था।
जबकि दिल्ली सरकार अपने अस्पतालों में केवल दिल्ली के लोगों का इलाज कराने पर विचार कर रही थी।
हालांकि इस शुरुआती टकराव के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की बात कही थी।