मुजफ्फरनगर में वर्ष 1994 में बीमा पॉलिसी के नाम पर बैंक में फर्जी बिल लगाकर किए गए 16,500 रुपये के घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने एलआईसी के तत्कालीन विकास अधिकारी एनके कौशिक को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद की अदालत ने दोषी पर 26 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक कुलदीप पुष्कर ने बताया कि वर्ष 1994 में मुजफ्फरनगर जनपद की एलआईसी शाखा के तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर आरके सक्सेना व एलआईसी के विकास अधिकारी एनके कौशिक ने 16,500 रुपये का घोटाला किया था।
दोनों अभियुक्तों ने चंडीगढ़ में तैनात विभाग के डॉक्टर जेएस बेदी के नाम के फर्जी बिल लगाकर एक बैंक से भुगतान प्राप्त किया। इसके अलावा देवबंद, मुजफ्फरनगर की चीनी मिलों में तैनात कर्मचारियों समेत कुल 415 लोगों के नाम की चिकित्सकीय जांच का फर्जी बिल लगाकर एक बैंक से एलआईसी के नाम पर रुपये वसूल लिए।
अभियुक्त आरके सक्सेना की केस विचारण के दौरान मौत हो गई थी, जिसकी रिपोर्ट 26 अप्रैल 2003 को सीबीआई ने कोर्ट में पेश की थी। इसके बाद आरके सक्सेना के खिलाफ केस खत्म हो गया था। सक्सेना की मौत के बाद अदालत में एनके कौशिक के खिलाफ मामला चल रहा था, जिसमें कुल 26 लोगों की गवाही हुई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी करार देते हुए पांच साल की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कौशिक ने 26 हजार रुपये जमा नहीं कराए तो उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी काटना होगा।