मानसून में दिल्ली का बुनियादी ढांचा फेल होने पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सख्त रुख अपनाया है। एलजी ने मुख्य सचिव को मासिक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इस साल बारिश के दौरान हुए जलभराव से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
एलजी के प्रधान सचिव आशीष कुंद्रा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों को उनके क्षेत्राधिकारों में आनी वाली सेवाओं का निरीक्षण करने के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करना चाहिए। इससे अधिकारियों को नागरिकों के समक्ष आ रही समस्याओं का प्रत्यक्ष अनुभव होगा। अधिकारी इन्हें देखकर समस्याओं के सुधार के लिए नीति या नियामक उपाय बना सकेंगे।
मुख्य सचिव सभी विभागों को निरीक्षण रिपोर्ट का एक समान प्रारूप प्रसारित करेंगे। उसी के आधार पर प्रत्येक अधिकारी निरीक्षणों की संख्या के बारे में मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। प्रधान सचिव ने लिखा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के नालों की सफाई पर गंभीर टिप्पणी की। इसमें कहा गया कि दिल्ली के नालों की सालों से सफाई नहीं हुई। सीवर लाइन जाम हैं। इससे नियोजित कॉलोनियों में भी बाढ़ आ रही है। यह वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी की ओर इशारा करता है। कुंद्रा ने कहा कि सभी विभागाध्यक्षों (एचओडी), सचिवों, प्रमुख सचिवों या अतिरिक्त मुख्य सचिवों को क्षेत्र का निरीक्षण की एक अनुसूची तैयार करेंगे। इनके लिए एक सप्ताह से 15 दिन का समय तय किया गया है।
दिल्ली में करती है कई एजेंसियां काम
पत्र में कहा गया कि दिल्ली में नालों की सफाई के लिए एमसीडी, एनडीएमसी, पीडब्ल्यूडी सहित कई एजेंसियां काम करती हैं। इनमें तालमेल का अभाव रहता है। दिल्ली से 22 बड़े नाले यमुना में गिरते हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी नाले हैं जिनका रखरखाव एक ही नाले का कई एजेंसियां करती हैं। समय पर इनकी सफाई न होने के कारण जलभराव की समस्याएं हुई। साथ ही पानी वापस आया। अलग-अलग एजेंसियों के तरफ से सफाई होने के कारण किसी एक की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता है।
ली जाएगी आरडब्ल्यूए की मदद
पत्र में जिला अधिकारियों को आरडब्ल्यूए की मदद लेने को कहा गया है। इसमें कहा गया कि जिला अधिकारी माह में एक बार आरडब्ल्यूए के साथ बैठक कर उनकी समस्या व सुझाव को लें। इनसे मिले सुझाव को जिला अधिकारी डिविजनल कमिश्नर को भेजेंगे।