फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

LG ने दिल्ली सरकार की रिपोर्ट बताई भ्रामक, कहा- 97 प्रतिशत फाइलों को तत्काल दी मंजूरी

Sat, 07 Apr 2018 10:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार की तरफ से विधानसभा में पेश आउटकम रिपोर्ट का जवाब दिया है। इसमें पूरी रिपोर्ट को भ्रामक करार दिया है। उपराज्यपाल के मुताबिक, उनके कार्यालय ने 97 प्रतिशत फाइलों को मंजूरी दे दी है।

विज्ञापन


नियमों पर खरी नहीं उतरने वाली कुछ फाइलों को ही दिल्ली सरकार को लौटाया गया। इसमें देरी की वजह खुद सरकार है। अगर सरकार ने नियमों का पालन किया होता तो संबंधित फाइल में भी देरी नहीं होती।

उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि वह फाइल और प्रस्ताव जो चुनी हुई सरकार के पास काफी समय से लंबित हैं, उनको उपराज्यपाल कार्यालय में लंबित दिखाया गया है। यह तथ्यों के साथ पूरी तरह से धोखा है।
विज्ञापन


दूसरी ओर ऐसे मामले जो कि रिपोर्ट में शामिल नहीं हैं, जहां फाइल बिना किसी कारण के दो से अधिक सालों (768 दिन) से मंत्री के पास लंबित हैं। कार्यालय की ओर से बताया गया है कि अभी तथाकथित आउटकम रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली है। लिहाजा उस पर सीधी टिप्पणी ठीक नहीं है।

फिर, विधानसभा के नियमों के अनुसार विधान सभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करते हैं। ऐसे में स्पष्टीकरण मीडिया में आई जानकारियों के आधार पर दिया जा रहा है।

विज्ञापन

उपराज्यपाल ने दिल्ली की संवैधानिक व्यवस्था का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा है कि मौजूदा चुनी हुई सरकार जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने की कोशिश कर रही है। वह संविधान और कानून के शासन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कभी संविधान की भावना और उसके शब्दों को अनदेखा नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ उन्हीं प्रस्तावों को सुधार के लिए वापस पास भेजा है, जो बिना प्रक्रिया के या अधूरे उनके पास भेजे गए।

बावजूद इसके चुनी हुई सरकार ने कई मामलों में उच्च न्यायालय के कई बड़े निर्णयों को बेकार साबित कर दिया है। मसलन, कमीशन आफ इन्क्वायरी के गठन की अधिसूचना, बिजली कंपनियों में नामित निदेशकों की नियुक्ति, न्यूनतम सर्कल रेट आदि।

उपराज्यपाल की तरफ से बताया गया कि उनके कार्यालय को लगभग दस हजार फाईल/प्रस्ताव प्राप्त हुये। इनका अनुमोदित करना था। इसमें से आरक्षित विषयों पर भी फाइलें/प्रस्ताव शामिल थे। इनमें से 97 फीसदी प्रस्तावों को बिना बदलाव के तुरंत मंजूरी दे दी गई।

केवल दो प्रस्तावों को ट्रांस्जक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स के तहत सलाह के लिए राष्ट्रपति को भेजा गया। जबकि तीन फीसदी से कम फाइलों को सरकार के पास स्पष्टीकरण या सुझाव के लिए वापस भेजा गया। उन तीन फीसदी में भी कई पर सहमति बनने के बाद मंजूरी दे दी गयी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें