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पानी की तलाश में जंगलों से बाहर निकलने लगे हैं तेंदुआ

Sun, 02 Apr 2017 02:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

-तेंदुआ के मूवमेंट के आधार पर बनाया गया है केवल पांच पिट, और है जरुरत 
-पेज..2 के लिए: 
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-तेंदुआ के मूवमेंट के आधार पर बनाया गया है केवल पांच पिट, और है जरुरत
-अरावली में जानवरों के लिए पानी मुहैया कराना बना वन विभाग के लिए चुनौती
शाहनवाज आलम
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- फोटो : SELF
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विस्तार
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अरावली के जंगलों में पानी का माकूल बंदोबस्त नहीं है। गर्मी के साथ ही तेंदुआ समेत अन्य जंगली जानवरों के लिए प्यास सताने लगी है। पानी की तलाश में आबादी के बीच आ रहे हैं।
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पिछले दिनों मांगर में दिखे तेंदुए और उसके पग मार्क के बाद वन विभाग की रिपोर्ट में भी तेंदुए के आने की वजह पानी की तलाश बताई गई है। सैंकड़ों एकड़ जमीन में फैले अरावली में पानी मुहैया कराना वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। 

दरअसल, अरावली में गिरते जल स्तर के कारण अब जानवरों के लिए पीने का पानी का इंतजाम नहीं है। गर्मी के दिनों में पानी नहीं मिलने की वजह से जानवरों को दिक्कत होने लगी है।
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राजस्थान और दिल्ली के वन्य जीव आरक्षित क्षेत्र से पानी की तलाश में अरावली के दूसरी छोड़ पर पहुंच रहे हैं। लगातार पानी की तलाश में अब आबादी के बीच पहुंचने लगे हैं। जिसके कारण लोग दहशत में है और वहीं वन्य जीवों के लिए भी खतरा बना हुआ है। 

पर्यावरणविदें के मुताबिक अरावली के एक हिस्से में बाघों के लिए आरक्षित सरिस्का (राजस्थान) का क्षेत्र लगता है। खाना और पानी के तलाश में अरावली की वादियों में पहुंच जाते है। 128 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए तेंदुए और अन्य जंगली जानवर अरावली की सबसे घना जंगल पार करने से भी गुरेज नहीं करते हैं।
  
कम बारिश जंगली जानवरों के लिए बन रहा है मुसीबत
-वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अरावली क्षेत्र में कम बारिश हो रही है। जिसकी वजह से सर्दी और फिर गर्मी में इस क्षेत्र में पानी की कमी होती जा रही है। रेतीली मिट्टी होने की वजह से पानी जल्दी सोख लेती है। जिसके कारण वन्य जीवों को दिक्कत होने लगी है।

मांगर-बनी से आगे खनन की वजह से बड़े-बड़े गड्ढे है, जो अब झील के रूप में तब्दील हो चुकी है। यह अब पानी का स्रोत बन गया है। इस वजह से वह जंगली जानवर यहां तक पहुंचने में गुरेज नहीं करते हैं।

वन विभाग ने यह किया है प्रयास
-वन विभाग की ओर से तेंदुए की गतिविधि के आधार पर पानी के पिट बनाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन अभी तक केवल 04 पिट बनाए गए हैं। दो पिट और अरावली में बनाने का निर्णय लिया गया है। वन विभाग द्वारा मंडावर और गुरुग्राम-फरीदाबाद हाईवे से सटे बंधवाड़ी के रोजका गुज्जर के अरावली क्षेत्र में 04 पिट बनाए गए हैं।

बता दें कि अरावली से सटे पांच जिलों में वन विभाग पिट बनाने की तैयारी कर रहा है। इसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात और महेंद्रगढ़ शामिल है। सभी जिलों में 6-6 पिट बनेंगे। हर पिट 20 से 30 फीट लंबा-चौड़ा और 6 फीट तक गहरा होगा। 

 अरावली के क्षेत्र में चार पिट बना दिए गए हैं। सभी डीएफओर को अपने क्षेत्र में पानी का इंतजाम करने को कहा गया है। इसके लिए अलग से ट्रैक्टर व टैंकर के जरिये पानी डालने को कहा गया है, ताकि जानवरों को दिक्कत नहीं हो। गर्मी को ध्यान में रखते हुए और भी पानी के स्रोत व इंतजाम पर काम शुरू कर दिया गया है। जंगली जानवरों की मूवमेंट पर ध्यान रखा जा रहा है। ...एमडी सिन्हा, वन संरक्षक, दक्षिण सर्कल, वन विभाग हरियाणा
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