अरावली के जंगलों में 12 तेंदुए हैं। इस बात का सबूत देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) द्वारा किए गए सर्वे में मिला है। अब डब्ल्यूआईआई इसका विश्लेषण करने में जुटी हुई है, ताकि दूसरे चरण का काम शुरू कर उनका रिहायश का पुख्ता जानकारी जुटाई जा सके। डब्ल्यूआईआई की फाइनल रिपोर्ट के बाद तेंदुओं के संरक्षण को लेकर सरकार कदम उठाएगी।
दरअसल, पहली बार प्रदेश सरकार हरियाणा के हिस्से के अरावली के जंगलों में पाए जाने वाले जंगली जानवरों की गणना करा रही है। भिवानी, मेवात, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फरीदाबाद और पलवल के क्षेत्रों में अरावली के घने जंगल है, जहां तेंदुओं और अन्य जंगली जानवरों की रिहायश है। डब्ल्यूआईआई के दो वैज्ञानिकों ने इन क्षेत्रों में साइन सर्वे किया था, जिसमें तेंदुआ के होने के निशान मिले। बता दें कि साइन सर्वे मांसाहारी जानवरों के लिए किया जाता है।
एक अधिकारी ने बताया कि अरावली में गुड़गांव-फरीदाबाद से लेकर भिवानी तक के क्षेत्र में 12 जगहों पर निशान मिले हैं। इनमें पग मार्क, स्क्रैप मार्क, मल-मूत्र के निशान शामिल हैं। सबसे कम निशान मेवात के क्षेत्र में मिले हैं। वहीं गुड़गांव के सहरावन के आगे, दमदमा झील के पास 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में तेंदुओं के पांव के निशान मिले हैं। इसके अलावा महेंद्रगढ़ के नारनौल वाले हिस्से में तेंदुए के पांव के निशान अधिक पाए गए। हरियाणा वन्य जीव विभाग और डब्ल्यूआईआई की ओर से किए सर्वे के आंकड़ाें की पुष्टि के लिए दूसरा चरण इसी महीने से शुरू होगा। इसे दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
तेंदुए पर हमेशा रहता है खतरा
अरावली के जंगलों में रहने के बावजूद तेेंदुए पर हमेशा खतरा रहता है। बीते दो वर्ष में शावक समेत आठ तेंदुओं की मौत हो चुकी है। अरावली में उनकी जीवन की सुरक्षा को लेकर पर्यावरणविद् सवाल उठाते रहे हैं। आमतौर पर गर्मियों के दिनों में पानी की तलाश में आबादी के क्षेत्रों में वे विचरण करते हुए आ जाते हैं।
तेंदुओं की संख्या कितनी है, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। डब्ल्यूआईआई वैज्ञानिक तरीके से जंगली जानवरों की गणना करने का काम कर रहा है। जब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। निश्चित ही अरावली में तेंदुए हैं।-रामबीर सिंह, वन्य जीव संरक्षक अधिकारी