इससे दुकानदारों को उधार देने में कोई परेशानी नहीं होगी और ग्राहकों को भी सहूलियत होगी। दरअसल आज भी किराने के दुकान पर लोग रोजमर्रा के सामान उधार ही खरीदते हैं। जैसे दूध, अंडा, ब्रेड, दही आदि।
इन सामानों का हिसाब महीने के आखिर में कर के दुकानदार ग्राहकों से पैसे लेते हैं। इस बीच उधारी लिखना भूल जाएं, तो नुकसान भी हो जाता है। दुकानदारों की इसी समस्या का समाधान करने के लिए एप तैयार किया गया है।
ऐसे मिला एप बनाने का आइडिया
अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि एक दिन पड़ोस की दुकान पर उधार सामान लेने गया, लेकिन दुकानदार ने सामान देने से मना करते हुए कहा कि उनका पहले से काफी पैसा लोग नहीं लौटा रहे हैं। ऐसे में उसने लोगों को उधार देने से मना कर दिया है।
दुकानदार की बात सुन कर उधार खाता एप का विचार आया। इसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एक महीने का ऐप डेवलपमेंट कोर्स किया है। फिर महीने भर एप बनाने पर काम किया। उधारी खाता मेरा पहला एप है।
इस ऐप को कोई भी दुकानदार गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकता है। इसमें अपनी शॉप का नाम रजिस्टर करना होगा। इसके बाद इसमें उधार खाता चलाने वाले अपने ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर फीड करना होगा।
ग्राहक के खाते में रोजाना खरीदने वाले सामानों को पहले ही उधार खाते की लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इसमें कभी भी बदलाव भी किया जा सकता है।
इस एप्लीकेशन में ग्राहक को रिमाइंड करने के लिए मैसेज भेजने की भी सुविधा है। हालांकि ऐप पर पेमेंट की सुविधा नहीं है, अभी सिर्फ एक नोटिफिकेशन की तरह काम करेगा।