लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। एक तरफ सत्ता दल है तो दूसरी तरफ पूरा विपक्ष गठबंधन करके भाजपा से मुकाबले के लिए जुगत लगा रहा है। इसी क्रम में विपक्ष को मजबूत करने के लिए प्रदेश में सबसे ज्यादा टिकट दावेदारी की लाइन बसपा के दरबार में लग रही है। विशेषकर पार्टी सुप्रीमो मायावती के गृह जनपद गौतमबुद्धनगर में इसका सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। पार्टी गठबंधन के संकेत दे चुकी है कि ऐसे में यह सीट उसी के खाते में जाएगी।
इससे सांसद बनने का सपना संजोए नेता मान बैठे हैं कि बहनजी का आशीर्वाद मिल गया तो जीत पक्की है। जीत मिली तो मंत्री भी बनना है। यही कारण है कि सपा हो, कांग्रेसी नेता हों या फिर भाजपा से रूठे नेता, वह चाहते हैं कि मौका उन्हें मिले।
यह हाल तब है जब पार्टी पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि इनका टिकट कट सकता है। ऐसे में अगर सपा, बसपा, कांग्रेस व लोकदल का संयुक्त प्रत्याशी उतारा जाता है तो भाजपा के मौजूदा सांसद डॉ. महेश शर्मा मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसे में नेताओं का लग रहा है कि अगर हाथी यानी बसपा का साथ मिल जाए तो किस्मत चमक सकती है, क्योंकि गौतमबुद्धनगर से जीत कुछ अलग ही मायने रखती है।