दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि केजरीवाल सरकार बुधवार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत कर रही थी। मगर कोर्ट के निर्णय के 24 घंटे के भीतर ही सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए दोबारा केंद्र सरकार व उपराज्यपाल के साथ टकराव के रास्ते पर है। दिल्ली सरकार ने फिर से अधिकारियों को डराना व धमकाना प्रारंभ कर दिया है।
विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को अपने कक्ष में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केजरीवाल सरकार कानूनी व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए उप राज्यपाल के साथ मिलकर लोगों के लिए काम करे। यदि केजरीवाल सरकार को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लंघन किया जा रहा है तो वह कोर्ट में अवमानना का केस दर्ज करने में क्यों डर रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर केजरीवाल सरकार जनता को गुमराह करके ध्यान भटकाने की कोशिश न करे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की 21 मई 2015 की अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की है और कोर्ट उसे निरस्त भी नहीं किया है। इस कारण यह अधिसूचना आज भी बरकरार है। संविधान के अनुच्छेद 239एए के अंतर्गत उपराज्यपाल को प्रदत्त शक्तियां अभी भी विद्यमान हैं। सर्विसेज व भ्रष्टाचार निरोधक शाखा अभी भी उपराज्यपाल के अधीन आएंगी। कोर्ट ने अनुच्छेद 239एए की व्याख्या कर दी है। इस व्याख्या के प्रकाश में इन मामलों की सुनवाई अब कोर्ट करेगा।