दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर छिड़ी जंग को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आए 24 घंटे भी नहीं हुए और झगड़ा फिर से शुरू हो गया। सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को झगड़े, लड़ाई और धरने के अलावा कुछ नहीं आता।
मनोज तिवारी ने एक बार फिर झगड़ा आरंभ होने पर कहा कि लगता है दिल्ली सरकार काम नहीं करेंगी, क्योंकि मुख्यमंत्री की नीयत साफ नहीं है। इसलिए वह कोर्ट को भी नहीं मान रहे है। वह काम नहीं करेंगे और सिर्फ अराजकता फलाएंगे। दरअसल उनकी मजबूरी यह है कि साढ़े तीन साल सरकार में होने के बावजूद कोई कार्य नहीं किया। अब जनता उनसे सवाल पूछेगी और उनके पास जवाब नहीं होगा।
इस कारण इन पर रोज झगड़ा करना, कोर्ट जाना और धरने पर बैठने का काम ही जम रहा है। दूसरी ओर मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा है कि साढ़े तीन साल से दिल्ली में राजनीतिक कारणों से उत्पन्न किए गए प्रशासकीय गतिरोध का सबसे बड़ा नुकसान शहर के विकास के ठप्प होने के रूप में हुआ है।
पानी एवं बिजली की कमी और चरमराई हुई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के कारण कराह रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद दिल्ली की जनता ने समझा था कि सरकार पानी, बिजली, सार्वजनिक परिवहन और प्रदूषण की स्थिति को सुधारने के लिए कार्य करने को प्राथमिकता देगी, मगर यह दुखद है कि सरकार ने पुन: अधिकारियों का लेकर विवाद प्रारम्भ कर दिया है।