जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के महासचिव नरवीर डबास का कहना है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में बदलाव और दिल्ली सरकार के नए चालान निपटारा नियम आम लोगों के हित में नहीं हैं। समिति के मुताबिक, चालान निपटाने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से हटाकर एसडीएम और अन्य विभागीय अधिकारियों को देना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा।
वकीलों का कहना है कि इससे अदालतों की भूमिका सीमित होगी और लोगों के निष्पक्ष न्याय पाने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि नियम वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।