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जामियाः पढ़ते छात्रों पर रुमाल से चेहरा छुपाकर लाठीचार्ज

Mon, 17 Feb 2020 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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जामिया - फोटो : SELF
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जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो अपलोड कर पुलिस कार्रवाई की भर्त्सना की। इसके बाद हर ओर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

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सीसीटीवी फुटेज लगने वाले इस वीडियो में दिखा कि अर्धसैनिक बल और पुलिस के 7-8 जवान लाइब्रेरी में घुसकर पढ़ाई कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसाना शुरू कर देते हैं। एक छात्र जान बचाने के लिए उनकी ओर किताब बढ़ाता है तो पुलिसवाला लाठी चला देता है। वीडियो में दिखे पुलिसवालों ने पहचान छिपाने के लिए चेहरे को रुमाल से ढक रखा था।

पिछले साल 15 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामिया में प्रदर्शन कर रहे छात्र और पुलिस आमने-सामने आ गए थे। पुलिस पर आरोप लगाया गया था कि लाइब्रेरी के अंदर छात्रों को बेरहमी से पीटा गया है। 
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बाकायदा कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें पुलिस की कार्रवाई से घायल छात्र इधर-उधर पडे़ दिख रहे थे। ऐसी किसी भी कार्रवाई से पुलिस अब तक साफ इनकार कर रही थी। रविवार को लाइब्रेरी में लाठीचार्ज का 48 सेकेंड का वीडियो सामने आने के बाद हंगामा मच गया।

 जामिया के छात्र पुलिस पर पथराव करते दिखे
उधर, उपद्रव वाले वीडियो में जामिया के छात्र पुलिस पर लगातार पथराव करते हुए देखे जा सकते हैं। पुलिस छात्रों से लगातार कैंपस में जाने की अपील करती दिखी। वीडियो में दावा है कि हिंसा कर रहे छात्र जामिया कैंपस की ओर भागे थे। दोनों वीडियो सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच जांच की बात कह रही है। उधर, पुलिस स्थापना दिवस के मौके पर इस मुद्दे पर पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।

44 सेकेंड के वीडियो में योजना बना पत्थर फेंकता दिखा छात्र
जामिया कैंपस की जाकिर हुसैन लाइब्रेरी के एक दूसरे वायरल हुए वीडियो में एक युवक हाथों में पत्थर लेकर दूसरी तरफ फेंकता हुआ नजर आ रहा है। पत्थर फेंकने से पहले वह अपने साथियों के साथ योजना बनाता हुआ भी दिख रहा है। हालांकि 44 सेकेंड के इस वीडियो में दिखे छात्र की पहचान अब तक नहीं हो पाई है।
 

तीसरे वीडियो में लाइब्रेरी में बैठते दिखे नकाबपोश

प्रदर्शन करते हुए - फोटो : अमर उजाला
लाइब्रेरी का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कुछ नकाबपोश लाइब्रेरी में आकर बैठते दिखे। इसके बाद पहले से भीतर बैठे छात्रों ने लाइब्रेरी के टेबल-कुर्सी को इस तरह लगाना शुरू कर दिया, जिससे मुख्य द्वार को न खोला जा सके। हालांकि इस वीडियो की तिथि और समय के बारे में पता नहीं चल पा रहा है।

चुनाव के बाद वीडियो जारी होने पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर जामिया में पुलिस की कार्रवाई का वीडियो जारी होने पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि दिल्ली चुनाव के बाद वीडियो सामने आने के पीछे कोई बड़ी साजिश है। सुबह से ही लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे थे। शाम तक तीन अन्य वीडियो वायरल होने के बाद स्थिति कुछ बदली। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन शुरू कर दिया।

पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो वायरल होने के बाद साफ हो गया कि बेकसूर छात्रों पर बेवजह लाठियां बरसाई गई हैं। वीडियो की जांच कराकर आरोपी पुलिसवालों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।।
- जामिया कोर्डिनेशन कमेटी

जामिया की डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी में लाठीचार्ज का वीडियो यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी नहीं किया गया है। जामिया कोर्डिनेशन कमेटी की ओर से इसे जारी किया गया है, जिसके सदस्य सीएए के विरोध में गेट नंबर-7 पर धरने पर बैैठे हैैं। इस कमेटी के बयानों को यूनिवर्सिटी से न जोड़ा जाए। कुछ दिन से सोशल मीडिया पर जामिया के नाम से कुछ ऑफिशियल अकाउंट का दावा किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। लोगों से गुजारिश है कि जामिया के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट की सूचना को ही सत्य मानें। ट्विटर से आग्रह किया गया है कि वह जामिया के अधिकृत ट्विटर हैंडल को वेरीफाई करे।
- अहमद अजीम, जामिया पीआरओ
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गृह मंत्री और दिल्ली पुलिसने बोला झूठ : प्रियंका

जामिया की लाइब्रेरी में पुलिस कार्रवाई का विडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी ने गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई कार्रवाई न हुई तो सरकार की मंशा भी साफ हो जाएगी। प्रियंका ने यह ट्वीट हिंदी में किया है।

पुलिस के व्यवहार बेहद अनुचित है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालयों में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई झूठ और गलत तथ्यों के सहारे राजनीतिक उद्देश्यों से की जा रही है। दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्री अमित शाह के आधीन है। वे लाइब्रेरी में पढ़ने वाले अपने युवा विद्यार्थियों से ऐसा व्यवहार करते हैं। शर्म। 
- सीताराम येचुरी, सीपीआईएम महासचिव

जांच एजेंसियों को वायरल वीडियो का इस्तेमाल करके अपनी जांच को आगे बढ़ाना चाहिए। दंगाइयों के लिए बेहतर है कि वे अपनी पहचान खुद ही बता दें। लाइब्रेरी में नकाबपोश बंद किताबों को पढ़ते दिख हैं। किताबों के बजाय उनकी नजर प्रवेश द्वार की ओर लगी है। क्या लाइब्रेरी पथराव के बाद दंगाइयों के छिपने की जगह है।
- अमित मालवीय, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख
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