15 अप्रैल से शुरू सम-विषम योजना का आज आखिरी दिन है। दिल्ली सरकार भले ही दावा कह रही है कि वायु प्रदूषण पर योजना का सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन योजना की समाप्ति से ठीक एक दिन पहले जारी किए गए आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।
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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के जरिये रिकॉर्ड किए जाने वाले वायु प्रदूषण के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी के कई इलाकों में हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 व 10) अपने तय मानक से खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं।
वहीं सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) का भी मानना है कि राजधानी में हवा दिनोंदिन ज्यादा प्रदूषित हो रही है। वहीं परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा कि सम-विषम योजना -3 को लागू करने का फैसला कमेटी रिपोर्ट और मीडिया सर्वे विश्लेषण के बाद कैबिनेट करेगी।
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सम-विषम से भी वायु प्रदूषण नहीं हुआ कम
- फोटो : अनिल कुमार
दिल्ली सरकार भले ही दावा कह रही है कि वायु प्रदूषण पर सम-विषम योजना का सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है लेकिन योजना की समाप्ति (15 से 30 अप्रैल) से ठीक एक दिन पहले जारी किए गए आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के जरिये रिकॉर्ड किए जाने वाले वायु प्रदूषण के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी के कई इलाकों में हवा में मौजूद पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 व 10) अपने तय मानक से खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं।
वहीं सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) का भी मानना है कि राजधानी में हवा दिनोंदिन ज्यादा प्रदूषित हो रही है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग रिसर्च (सफर) के आंकड़ों से पता चलता है कि खतरनाक ओजोन भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
डीपीसीसी ने शुक्रवार को आंकड़े जारी किए हैं। 27 अप्रैल को रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों में राजधानी के 74 स्थानों के पर्टिकुलेट मैटर का ब्योरा दिया गया है।
भजनपुरा में खतरनाक स्तर पर पहुंचा पीएम 2.5
सम-विषम फिर से
- फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली
आंकड़ों के मुताबिक भजनपुरा इलाके में बुधवार को पर्टिकुलेट मैटर 2.5 (हवा में मौजूद बारीक धूल कण) का स्तर तय मानक (60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) को तोड़ते हुए अत्यंत खतरनाक स्थिति यानी 412 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था।
वहीं पर्टिकुलेट मैटर 10 अपने सामान्य स्तर (100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) से दोगुना से अधिक यानी 278 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया।
इसी तरह नोएडा बॉर्डर, आनंद विहार बॉर्डर, कालकाजी, बादली, नंद नगरी, वसंत विहार, जहांगीर पुरी (आउटर रिंग रोड) में भी पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 व पीएम 10) अपने सामान्य स्तर से काफी अधिक थे।
जारी रहा उतार चढ़ाव
सफर के जरिये 24 घंटों के औसत आकलन के आंकड़े भी यह बताते हैं कि 15 अप्रैल से 29 अप्रैल तक पर्टिकुलेट मैटर 2.5 में उतार-चढ़ाव जारी रहा।
इनमें 15, 18 और 21 अप्रैल को छोड़कर बाकी सभी दिन पीएम 2.5 अपने सामान्य मानक से कहीं ज्यादा (औसत करीब 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर ) रिकॉर्ड किए गए। सफर फोरकास्टिंग के मुताबिक 30 अप्रैल को भी हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 अपने सामान्य मानक से कहीं ज्यादा होंगे।
अभी नहीं हुआ अंतिम आकलन
डीपीसीसी के मुताबिक बुधवार को कुल 74 में से महज 28 स्थानों पर पीएम 2.5 अपने तय मानक से कम रिकॉर्ड किए गए। वहीं पीएम 10 का रिकॉर्ड भी अधिकांश जगहों पर अपने सामान्य मानक से अत्यंत ज्यादा रहा।
डीपीसीसी के एक अधिकारी ने बताया कि अभी सम-विषम योजना के आंकड़ों का विश्लेषण नहीं हुआ है। योजना की समाप्ति के बाद ही इन आंकड़ों का विश्लेषण होगा।
द एनर्जी रिसोर्सेज एंड इंस्टीट्यूट की ओर से रोजाना जारी होने वाले आंकड़ों में भी सम-विषम योजना के दौरान प्रदूषण स्तर में उतार-चढ़ाव जारी रहा है। टेरी के मुताबिक बीते पांच दिन से हवा में पर्टिकुलेट मैटर अपने तय मानकों से ज्यादा हैं।
टेरी ने इसका कारण राजधानी में बाहर से आने वाली प्रदूषित हवाओं को बताया है। टेरी के मुताबिक बीते पांच दिनों में पीएम 2.5 अपने सामान्य स्तर से 1.8 गुना ज्यादा हैं।
वहीं एनसीआर में पीएम 10 में 1.3 से 5.1 गुना ज्यादा तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा गैसीय प्रदूषण में नाइट्रोजन ऑक्साइड भी अपने तय मानकों से 2.8 से लेकर 4.5 गुना ज्यादा तक रिकॉर्ड किया गया है। दिल्ली में मौजूदा प्रदूषण की स्थिति ठंड में रिकॉर्ड किए जाने वाले प्रदूषण की तरह ही है।