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रमजान का पहले जुमे पर उमड़ा रोजेदारों का हुजूम

Sat, 11 Jun 2016 04:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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रमजान के पहले जुम्मे की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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रमजान के मुकद्दस महीने के पहले जुमा (शुक्रवार) पर मस्जिदों में रोजेदारों की भीड़ रही। आम दिनों के मुकाबले लोगों की तादाद ज्यादा रही। भीड़ के कारण शहर की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार जामा मस्जिद छोटी पड़ गई, लोगों को मस्जिद के बाहर, पार्क और मस्जिद से सटी दुकानों की छतों पर नमाज अदा करनी पड़ी।
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भीड़ में बुजुर्गों के अलावा नौजवानों और मासूमों की भी जमात दिखी। मस्जिद के बाहर भी दुकानें सजी रही। जुमे की अजान के पहले ही मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। मस्जिद में आते ही लोग कुरान की तिलावत और नमाज के जरिए अल्लाह की इबादत में मशगूल हो गए। विभिन्न मजिस्दों में इमामों ने अपनी तकरीर में रमजान की अहमियत बताई और कहा कि हम नमाज पढ़ते है तो दिखता है, हज करते है तो दिखता है, जकात देते है तो दिखता है। लेकिन रोजा एक ऐसी छुपी हुई इबादत है जिसमें हम भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं, अल्लाह को ये रोजा रखना बहुत पसंद है और वो इस रमजान के महीने में हमारी दुआओं को जरूर कुबूल करता है।
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जामा मस्जिद के इमाम ने कुरान का हवाला देते हुए लोगों को समझाया कि रमजान के दिनों में एक नेकी के बदले अल्लाह 70 नेकियों का सवाब देता है। रमजान के महीने में शैतान को कैद कर दिया जाता है, जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। अल्लाह ने ये इनाम हमें अता किया है, हमें इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए, हर वक्त इबादत, तिलावत करना चाहिए। रोजेदारों ने नमाज के दौरान देश में अमन शांति, व भाईचारे को बनाए रखने के लिए अल्लाह से दुआ मांगी। नमाज के बाद मस्जिद के बाहर अल्लाह की रजामंदी के लिए लोगों ने गरीबों को खैरात भी दी।
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