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किसान आंदोलनः खानपान के साथ कंबल, ब्रश और जूते-चप्पल का भी लंगर

Sun, 13 Dec 2020 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
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ऐसा ही एक लंगर... - फोटो : amar ujala
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किसान आंदोलन में खानपान का ही नहीं, कपड़े, कंबल, टूथपेस्ट, ब्रश, जूता, चप्पल का लंगर भी चल रहा है। थकान उतारने के लिए मसाज मशीनें भी लगी हैं। बीते पंद्रह दिनों में करीब दस ट्रक गरम कपड़े यहां बांटे जा चुके हैं। हर दिन करीब पांच सौ किसान मसाज मशीनों से अपनी थकान मिटाते हैं। अपने तरह का अनूठा लंगर दिनभर खुला रहता है। इसकी देखरेख मल्टी नेशनल कंपनियों के प्रोफेशनल्स के हाथों में है। बतौर, सेवादार वह दो-तीन दिन काम करके वापस लौट जाते हैं।

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सिंघु बार्डर पर आंदोलनकारियों की तरफ बढ़ते ही करीब 500 मीटर आगे पंजाब के खालसा एड ने लंगर लगा रखा है। दाई तरफ नजर पड़ते ही किसानों की लंबी लाइन दिखी। यहां पर किसान मसाज करवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। यहां 12 मशीनें किसानों की सेवा में लगी हैं। जालंधर में एक मल्टीनेशल कंपनी के अकाउंट सेक्शन में काम करने वाले सुखविंदर सिंह ने बताया कि दिन चढ़ने के साथ ही यहां भीड़ लग जाती है। शाम ढलने से पहले तक किसानों की सेवा चलती रहती है। नौकरी और सेेवा के तालमेल पर उनका कहना था कि बृहस्पतिवार को वे यहां पहुंचे। एक-दो दिन बाद फिर वापस पंजाब लौट जाएंगे और उनकी जगह कोई दूसरा आ जाएगा।



दूसरी तरफ लंगर के संचालक तेजेंदर पाल सिंह उर्फ प्रिंस ने बताया कि किसानों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है। अन्नदाता अगर सड़क पर हैं तो उनकी मेहनत पर पेट भरने वाले हम लोग कैसे घर बैठ सकते हैं। अपने घर से दूर किसानों को हर दिक्कत को दूर करने के मकसद से यहां हम लोगों ने लंगर लगा रखा है। जब तक आंदोलन चलेगा, हम लोग पीछे नहीं हटेंगे। मसाज मशीन लगाने के सवाल पर उनका कहना था कि शुरुआत में यह मशीनें नहीं थी, लेकिन लंगर में आने वाले किसानों की तकलीफ देखकर पिछले दिनों 12 मशीनें लगा दी गई हैं।
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समय के हिसाब से बांटा जाता है सामान
संचालकों का कहना है कि हर सामान की किट बनाई गई है। सुबह 9 बजे तक ब्रश, मंजन, साबुन आदि की किट दी जाती हैं, जबकि दिन में कपड़े और जूते-चप्पले बांटे जाते हैं। शाम होने से पहले कंबल और गद्दे का लंगर लग जाता है। किसान अपनी जरूरत के हिसाब से सामान लेकर चले जाते हैं।

भाप से एक साथ बनते हैं चार लजीज व्यंजन, 500 का भरता है पेट
नई दिल्ली। सिंघु बॉर्डर पर किसानों को लजीज व्यंजन उपलब्ध कराने के लिए गुरदासपुर लंगर ने स्टीम ब्वॉयलर लगा रखा है। बिना एलपीजी और बिजली की मदद के यहां एक साथ चार तरह का खाना पकाया जाता है। इसकी तकनीक भी बड़ी शानदार है। ब्वॉयलर में पानी भरकर उसे लड़की से गरम किया जाता है और फिर इससे एक साथ जुड़े बड़े-बड़े डेग में भाप को नियंत्रित करके भेजा जाता है। इससे भाप बेकार नहीं जाती है। 

सेवादार गुरुप्रताप सिंह का कहना है कि ब्वॉलर के साथ चार डेग जुड़े हुए हैं। इनमें चावल, दो तरह की सब्जी और दाल पकाई जाती है। चारों बर्तन में उबलने योग्य भाप भेजी जाती है। पूरी प्रक्त्रिस्या नियंत्रित होती है। पानी उबालने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल होता है। इससे जल्दी खाना तैयार हो जाता है। एक बार में खाने की मात्रा इतनी रहती है कि 500 लोगों को खिलाया जा सके। दिनभर इस पर काम चलता रहता है। 

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