उन जगहों पर जाकर जमीन खरीदी, जहां पर प्राधिकरण का कोई योजना नहीं थी। उस दौरान सत्ता के करीबी नेता, अधिकारी व उनके रिश्तेदार किसानों से जमीन खरीदते और फिर उनसे प्राधिकरण जमीन खरीद लेता। इसके एवज में बढ़ा-चढ़ाकर मुआवजा दिया जाता। इस कारगुजारी से यमुना प्राधिकरण कर्ज के नीचे इतना दब गया कि किसी तरह की बड़ी परियोजना लाने की स्थिति में नहीं आ रहा। अब कर्ज ढाई हजार करोड़ रुपये से कम पर पहुंच गया है।
शासन के निर्देश पर यीडा में जीरो पीरियड प्रकरणों की जांच शुरू हो गई है, जबकि नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के प्रकरणों की जांच जल्द होने जा रही है। यीडा में बिल्डरों को इस पीरियड का लाभ देने में भी पीसी गुप्ता का नाम सबसे आगे है। वर्ष 2010 से 2016 के बीच जीरो पीरियड की जांच हो रही है जबकि पीसी गुप्ता 2013 से 2015 तक यीडा में सीईओ के पद पर तैनात रहे। उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा बिल्डरों को इसका लाभ दिया गया।