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गर्भवती होने के कारण रोका प्रमोशन तो HC ने लगाई फटकार, कहा- ये स्वीकार नहीं किया जाएगा

Sun, 11 Feb 2018 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi high court
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सीआरपीएफ की महिला कर्मी को महज इस आधार पर प्रमोशन न देना, कि वह उस वक्त गर्भवती थी। यह दर्शाता है कि फोर्स में महिला कर्मियों के साथ लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए सीआरपीएफ की खिंचाई की है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और नवीन चावला ने सीआरपीएफ द्वारा महिला कर्मी के प्रमोशन पर लगाई गई रोक के ऑर्डर को रद्द करते हुए कहा कि गर्भवती होने के आधार पर भेदभाव कर प्रमोशन पर रोक लगाना घिनौनी मानसिकता है और यह लिंग के आधार पर भेदभाव करने जैसा है।

साथ ही समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। पीठ ने सीआरपीएफ की खिंचाई करते हुए कहा कि यह महिला कर्मी का हक है कि वह ड्यूटी के दौरान भी मां बन सकती है और ऐसी स्थिति में उसके विभाग द्वारा ही भेदभाव का रवैया अपनाना बेहद शर्मनाक है।
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यह याचिका सीआरपीएफ की महिला कर्मी शर्मिला यादव द्वारा दायर की गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद के लिए होने वाली विभागीय परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया था, लेकिन 2011 में जब प्रमोशन की लिस्ट जारी हुई तो उसमें उसका नाम नहीं था।
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उसके गर्भवती होने के कारण मेडिकल स्तर पर बाहर निकाल दिया गया था। जिस कारण उसका प्रमोशन रुक गया और उसके सहकर्मी सीनियर बन गए। 

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