फरीदाबाद में सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी की जानकारी श्रम विभाग के अधिकारियों ने अपने मंत्री से भी छिपाए रखी। सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाने के बाद भी मंत्री को कोई जानकारी नहीं दी गई। माना जा रहा है कि क्रेशर जोन मालिकों की लॉबी के दबाव में अधिकारियों का कभी इस बारे में मुंह ही नहीं खुला।
प्रदेश के श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिवचरण लाल शर्मा ने कहा कि उन्हें मंत्री बने करीब पांच साल होने जा रहे हैं लेकिन कभी अधिकारियों ने इसका जिक्र तक नहीं किया।
इस तकनीकी पहलू पर अधिकारियों को उन्हें जानकारी देनी चाहिए थी। शर्मा ने कहा कि वह अधिकारियों की मीटिंग हमेशा लेते रहते हैं, लेकिन इतने गंभीर मुद्दे पर किसी का जिक्र न करना गंभीर मामला है।
श्रमिक नेता से मंत्री बने शर्मा का कहना है कि इस बारे में वे संबंधित अधिकारियों को बुलाकर पूछेंगे। यह बात सही है कि क्रेशर जोन में काम करने वाले श्रमिकों का फेफड़ा धूल से खराब हो जाता होगा। ऐसे में उन्हें न्याय मिलना ही चाहिए।
अपने ही विभाग के मंत्री को न बताना हास्यास्पद:
फरीदाबाद के सिलिकोसिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने वाले पीपल्स राइट्स एंड सोशल रिसर्च सेंटर के निदेशक एसए आजाद ने कहा है कि यह बहुत हास्यास्पद बात है कि श्रम विभाग के अधिकारी फैक्ट्री एक्ट में नोटिफाई डिजीज के बारे में भी अपने विभाग के ही मंत्री को नहीं बता रहे हैं। सिलिकोसिस होने पर श्रमिक को क्षतिपूर्ति मिलने और कार्य स्थल पर इसकी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर क्रिमिनल केस दर्ज करने का प्रावधान है। इसलिए अधिकारी क्रेशर मालिकों पर कार्रवाई करने से बचने के लिए सबकुछ फाइलों में बंद किए रहते हैं।